US: डोनल्ड ट्रंप प्रशासन में अरबपतियों की फौज

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन के गठन में एक नया और चौंकाने वाला कीर्तिमान स्थापित किया है। उपभोक्ता वकालत समूह ‘पब्लिक सिटिजन’ द्वारा सोमवार को जारी एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने प्रशासन में अत्यधिक अमीर लोगों को शामिल करने के मामले में अमेरिकी इतिहास के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए उन अधिकारियों की संख्या, जिनकी संपत्ति 10 करोड़ डॉलर (लगभग 950 करोड़ रुपये) से अधिक है, पिछले तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों के संयुक्त आंकड़ों से भी चार गुना ज्यादा है।

खुद एक सफल और अरबपति व्यवसायी रहे डोनल्ड ट्रंप ने अपने इस फैसले का हमेशा पुरजोर बचाव किया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की अत्यधिक वित्तीय सफलता ही उसकी प्रशासनिक योग्यता, कार्यकुशलता और बुद्धिमानी का सबसे बड़ा प्रमाण है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में धनी लोगों का सरकार में होना आम जनता के हितों के खिलाफ जा सकता है।

प्रशासन में संपत्ति का अभूतपूर्व वितरण
डोनल्ड ट्रंप के इस दूसरे कार्यकाल में व्यक्तिगत वफादारी के साथ-साथ अपार निजी संपत्ति नियुक्ति का सबसे प्रमुख पैमाना बनकर उभरी है। रिपोर्ट के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्तमान प्रशासन में कुल 57 ऐसे अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं जिनकी व्यक्तिगत संपत्ति कम से कम 10 करोड़ डॉलर आंकी गई है। इनमें से 17 अधिकारियों को विभिन्न देशों में राजदूत के रूप में भेजा गया है, जबकि शेष 40 अधिकारी व्हाइट हाउस और अन्य कार्यकारी शाखाओं में वरिष्ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

ट्रंप कैबिनेट के सबसे धनी सदस्य
• हॉवर्ड लुटनिक: ट्रेजरी सेक्रेटरी के रूप में अरबपतियों की सूची में शामिल।
• लिंडा मैकमोहन: शिक्षा मंत्री, जिनके पास करोड़ों डॉलर का व्यापारिक साम्राज्य है।
• स्टीफन फेनबर्ग: उप रक्षा मंत्री के पद पर तैनात कद्दावर निवेशक।
• केली लोफ्लर: लघु व्यवसाय प्रशासन की प्रशासक।
• स्कॉट बेसेंट: ट्रेजरी सेक्रेटरी, जो वित्तीय बाजार के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं।
• स्टीव विटकॉफ: विशेष दूत, जो ट्रंप के करीबी और सफल रियल एस्टेट डेवलपर हैं।

पिछले राष्ट्रपतियों से तुलनात्मक अंतर
अमेरिकी राजनीति में धनी लोगों को सलाहकार या राजदूत बनाना कोई नई परंपरा नहीं है, लेकिन ट्रंप के समय में यह संख्या असाधारण रूप से बढ़ गई है। पब्लिक सिटिजन की रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और डेमोक्रेट राष्ट्रपति जो बाइडन के पूरे प्रशासन में 10 करोड़ डॉलर से अधिक संपत्ति वाले केवल पांच-पांच अधिकारी थे। वहीं, बराक ओबामा के कार्यकाल में ऐसे अधिकारियों की संख्या मात्र तीन थी। इसके विपरीत, अकेले ट्रंप के 23 सदस्यीय कैबिनेट में से आठ सदस्य इस ‘सुपर-रिच’ श्रेणी में आते हैं।

चुनावी वादों और हकीकत का विरोधाभास
यह नियुक्तियां ट्रंप के चुनावी आधार और उनके द्वारा किए गए वादों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा करती हैं। डोनल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी मुख्य रूप से मध्यम आय वर्ग और कामकाजी वर्ग के मतदाताओं के समर्थन से हुई है। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने बार-बार महंगाई कम करने और आम आदमी की जेब को राहत पहुँचाने का वादा किया था। अब जब प्रशासन की कमान अरबपतियों के हाथ में है, तो यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह ‘संभ्रांत वर्ग’ वास्तव में उन श्रमिकों और किसानों की समस्याओं को समझ पाएगा जिन्होंने उन्हें वोट दिया है।

प्रमुख चिंताएं और जोखिम
हितों का टकराव: रिपोर्ट के अनुसार, जब सरकार में इतने अधिक धनी लोग शामिल होते हैं, तो नीति निर्धारण के समय निजी लाभ और सार्वजनिक सेवा के बीच की रेखा धुंधली हो सकती है।
प्राथमिकताओं में भटकाव: संभ्रांत वर्ग का जमावड़ा सरकार की प्राथमिकताओं को आम जनता से हटाकर कॉर्पोरेट और धनी वर्ग की ओर मोड़ सकता है।
भ्रष्टाचार की आशंका: पब्लिक सिटिजन की सह-अध्यक्ष लिसा गिलबर्ट ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति भ्रष्टाचार के नए द्वार खोल सकती है।

सूची से बाहर हैं ट्रंप और मस्क
दिलचस्प बात यह है कि इस रिपोर्ट की गणना में स्वयं राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उनके प्रमुख सलाहकार एलन मस्क को शामिल नहीं किया गया है। यदि इन्हें भी शामिल किया जाए, तो संपत्ति का यह आंकड़ा और भी विशाल हो जाएगा। फोर्ब्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की निजी संपत्ति 6 अरब डॉलर से अधिक है। वहीं, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की कुल संपत्ति लगभग 860 अरब डॉलर आंकी गई है। मस्क वर्तमान में संघीय सरकार के खर्चों में कटौती करने और प्रशासन को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए ट्रंप को सलाह दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अरबपतियों की यह टीम अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन में क्या बदलाव लाती है।

 

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