वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रक्षा विभाग (पेंटागन) को एक बड़ा और चौंकाने वाला निर्देश देते हुए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले आगामी संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दायरे को काफी कम करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने इस कटौती के पीछे मुख्य रूप से दो कारण बताए हैं—पहला, ईरान के खिलाफ अमेरिकी मिशन में दक्षिण कोरिया द्वारा सहयोग से इनकार करना और दूसरा, उत्तर कोरिया के साथ संबंधों में इन अभ्यासों के कारण पैदा होने वाला तनाव।
डोनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से संपर्क किया था। ट्रंप चाहते थे कि दक्षिण कोरिया ईरान को परमाणु-मुक्त करने के अमेरिकी प्रयासों में साझीदार बने और वाशिंगटन का सहयोग करे, लेकिन सियोल की ओर से इस प्रस्ताव पर ‘नहीं, धन्यवाद’ कहकर मना कर दिया गया। दक्षिण कोरिया के इस जवाब ने ट्रंप को इस गठबंधन पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
| ट्रंप की आपत्तियों के मुख्य बिंदु |
| • ईरान पर असहयोग: दक्षिण कोरिया ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की अमेरिकी योजना में साथ देने से मना किया। |
| • उत्तर कोरिया को गलत संकेत: ट्रंप का मानना है कि ये अभ्यास उत्तर कोरिया के लिए ‘दुश्मनी भरे और अनुचित’ संकेत हैं। |
| • आर्थिक बोझ: राष्ट्रपति ने इन सैन्य अभ्यासों को अत्यधिक खर्चीला और फिजूलखर्ची बताया है। |
| • पुराना अनुभव: ट्रंप के अनुसार, उत्तर कोरिया का व्यवहार उनके कार्यकाल में हमेशा सम्मानजनक और शांतिपूर्ण रहा है। |
सैन्य अभ्यासों का स्वरूप और उत्तर कोरिया की धमकी
प्रस्तावित सैन्य अभ्यास 11 दिनों तक चलने वाले थे, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग 18,000 सैनिकों की भागीदारी तय थी। इन अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया की ओर से मिलने वाली किसी भी संभावित चुनौती के खिलाफ अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करना था। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन अभ्यासों में ‘लाइव-फायर’ ड्रिल, सटीक लक्ष्यीकरण, जटिल युद्धाभ्यास और पहले से तैनात सैन्य उपकरणों का वितरण शामिल था।
हालांकि, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने इन अभ्यासों की कड़ी निंदा की थी। किम जोंग उन ने इन्हें ‘आक्रामक युद्ध का पूर्वाभ्यास’ करार देते हुए अमेरिका और दक्षिण कोरिया को गंभीर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हाल के दिनों में उत्तर कोरिया ने कई बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण भी किए हैं, जिससे इस क्षेत्र में तनाव पहले ही बढ़ा हुआ है। अब ट्रंप के आदेश के बाद रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को इन अभ्यासों के आकार और तीव्रता में बड़ी कटौती करनी होगी।
| क्षेत्रीय सुरक्षा और नए समझौते |
| दक्षिण कोरिया के प्रति कड़ा रुख अपनाने के साथ ही डोनल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में उभर रहे नए रक्षा समीकरणों पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ की सराहना की। उन्होंने इसे एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इन देशों का एकजुट होना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। |
ट्रंप का यह फैसला दर्शाता है कि वे उन सहयोगी देशों के प्रति सख्त नीति अपना रहे हैं जो अमेरिकी रणनीतिक हितों में सक्रिय सहयोग नहीं दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि इन अभ्यासों को अब पूरी तरह रद करने का समय निकल चुका है, इसलिए फिलहाल इनमें केवल कटौती का ही विकल्प बचा है। इस कदम से दक्षिण कोरिया और अमेरिका के दशकों पुराने रक्षा संबंधों में दरार आने की आशंका जताई जा रही है, जबकि उत्तर कोरिया इसे अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में देख सकता है। आने वाले दिनों में पेंटागन इस आदेश को धरातल पर उतारने के लिए नई रूपरेखा तैयार करेगा।
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