नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने और मैदान पर घटती सक्रियता को लेकर बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। खिलाड़ियों के फिटनेस स्तर में आ रही गिरावट और जांच प्रक्रिया में एकरूपता की कमी को दूर करने के लिए बोर्ड ने अपने पूरे फिटनेस सिस्टम को दुरुस्त करने का निर्णय लिया है। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की मेडिकल टीम अब सभी खिलाड़ियों के लिए एक समान और निश्चित न्यूनतम मानक तैयार करने पर काम कर रही है।
बोर्ड का मानना है कि फिटनेस परीक्षणों के लिए स्पष्ट और कड़े मानक न होना टीम इंडिया की समग्र फिटनेस में गिरावट की एक प्रमुख वजह है। पिछले साल जब एड्रियन लेरोक्स भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच बने थे, तब यो-यो टेस्ट के स्थान पर ब्रोंको टेस्ट को प्रमुखता दी गई थी। हालांकि, अब तक ब्रोंको टेस्ट को पास करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं थी, जिसे लेकर अब सुधार किया जा रहा है।
ब्रोंको और 2के टेस्ट के लिए समय सीमा तय
बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने अब फिटनेस परीक्षणों के लिए नए आधार समय निर्धारित किए हैं। अब किसी भी खिलाड़ी को फिट कहलाने के लिए ब्रोंको टेस्ट को 5.15 से 5.20 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। इसके अलावा, दो किलोमीटर दौड़ (2के टेस्ट) के लिए 9 से 10 मिनट का मानक तय किया गया है। इससे पहले यो-यो टेस्ट के लिए 16.5 का स्कोर अनिवार्य था। इन नए मानकों के लागू होने से खिलाड़ियों की सहनशक्ति और गति का सटीक आकलन हो सकेगा।
| भारतीय खिलाड़ियों के लिए नए फिटनेस मानक |
| • ब्रोंको टेस्ट: 5.15 से 5.20 मिनट के भीतर पूरा करना अनिवार्य। |
| • दो किलोमीटर दौड़ (2के टेस्ट): 9 से 10 मिनट की समय सीमा निर्धारित। |
| • यो-यो टेस्ट: पूर्ववत 16.5 का स्तर बनाए रखने की आवश्यकता। |
| • सख्ती: सीनियर खिलाड़ियों के लिए अब अलग या आसान मानक नहीं होंगे। |
सीनियर खिलाड़ियों को मिलने वाली छूट पर रोक
बीसीसीआई को ऐसी रिपोर्ट मिली थीं कि पिछले एक साल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट में ढील दी थी और उनके लिए लक्ष्य अपेक्षाकृत आसान रखे गए थे। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया और टीम प्रबंधन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। टीम प्रबंधन ने फिजियो कमलेश जैन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि उसकी फिटनेस में रत्ती भर भी कमी है, तो उसे तत्काल रिपोर्ट किया जाए। हाल ही में हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों को फिट घोषित किए जाने पर भी आंतरिक सवाल उठे हैं।
जसप्रीत बुमराह की फिटनेस और इंग्लैंड दौरे का प्रभाव
आयरलैंड और इंग्लैंड के हालिया दौरों पर टीम इंडिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जहाँ खिलाड़ियों को अनुकूल मौसम के बावजूद ऐंठन (Cramps) की समस्या से जूझते देखा गया। विकेटों के बीच दौड़ने की क्षमता और फील्डिंग के दौरान सुस्ती ने बोर्ड की चिंता बढ़ा दी है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का मामला भी बोर्ड के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। चयनकर्ताओं को उम्मीद थी कि वे 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ होने वाले पहले टेस्ट के लिए फिट हो जाएंगे, लेकिन सीओई उन्हें समय पर तैयार करने में विफल रहा।
बीसीसीआई की इस नई पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही खिलाड़ी मैदान पर उतरें जो शारीरिक रूप से शत-प्रतिशत फिट हों। आने वाले समय में श्रीलंका सीरीज और घरेलू सत्र के दौरान इन नए फिटनेस मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे भारतीय टीम की फील्डिंग और गेंदबाजी की धार को फिर से बहाल किया जा सके।
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