चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन भारी हंगामे और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की भेंट चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए भीतर दाखिल हुए। विपक्ष के सदस्य विरोध स्वरूप गले में काले पटके पहनकर आए थे। उनका आरोप था कि पिछले दिनों सदन परिसर में उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ।
सत्र के दौरान सबसे अधिक विवाद ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन विधेयक-2026’ को लेकर हुआ। शून्य काल में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया ने श्री अकाल तख्त साहिब का हवाला देते हुए कुछ विशेष टिप्पणियां कीं। इन टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गनीव कौर की टिप्पणियों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने के निर्देश जारी किए।
| विधानसभा सत्र के मुख्य घटनाक्रम |
| • हंगामे के चलते 8 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। |
| • गनीव कौर मजीठिया की विवादित टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटाई गईं। |
| • कांग्रेस विधायकों ने काले पटके पहनकर धक्का-मुक्की का विरोध किया। |
| • वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस के इतिहास को बताया सिख विरोधी। |
| • पीएसआईईसी में ईडी की छापेमारी पर विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब। |
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास सिख विरोधी गतिविधियों से भरा रहा है और उन्होंने सिखों के अधिकारों को कुचलने का काम किया है। चीमा ने तर्क दिया कि जिस दल ने सिखों पर अत्याचार किए हों, उसे धार्मिक विषयों पर राजनीति करने का कोई हक नहीं है। वहीं, कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार श्री अकाल तख्त साहिब और सिख संस्थाओं का हृदय से सम्मान करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जत्थेदार द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट आने तक इस संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सदन में व्यवस्था बनाने की कोशिश करते हुए अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि सदन सभी विधायकों का सम्मान सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को भरोसा दिलाया कि यदि किसी के साथ अभद्र व्यवहार हुआ है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी जांच के प्रति सरकार की सहमति जताई। हालांकि, अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और अन्य कांग्रेस विधायकों द्वारा लाए गए ‘काम रोको’ प्रस्तावों को नियमों के विरुद्ध बताते हुए खारिज कर दिया।
शून्य काल में ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई का मुद्दा भी गूंजा। प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी हो रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में करोड़ों का घोटाला हुआ है, जिसमें सरकार के करीबी लोग शामिल हैं। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि शून्य काल में उठाए गए हर मुद्दे पर सरकार का तत्काल जवाब देना अनिवार्य नहीं है। लगातार होते शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
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