Punjab: पंजाब विधानसभा में गूँजे जनहित के मुद्दे, कर्मचारियों के डीए से लेकर अमृतपाल और बंदी सिंहों की रिहाई पर मची रार

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शून्यकाल के दौरान सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। विपक्ष ने कर्मचारियों के लंबित भत्तों, बंदी सिंहों की रिहाई और सांसद अमृतपाल सिंह के अधिकारों सहित कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को जमकर घेरा। इस दौरान विधायकों ने प्रदेश की बुनियादी समस्याओं, जैसे जलभराव, खराब सड़कें और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को भी प्रमुखता से उठाया।


सात लाख कर्मचारियों के 14 हजार करोड़ का बकाया
सदन में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने प्रदेश के करीब सात लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) का मामला पूरी मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का करीब 14 हजार करोड़ रुपये का डीए पिछले चार वर्षों से बकाया है। बाजवा ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें सरकार को 15 दिन के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने वित्त मंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जाकर मामले को और लटकाएगी या कर्मचारियों को उनका हक देगी। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।


बंदी सिंहों की रिहाई और अमृतपाल सिंह का मुद्दा
अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने जेलों में बंद ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई और पैरोल का विषय उठाया। उन्होंने जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह राजोआणा जैसे कैदियों का जिक्र करते हुए मानवीय आधार पर उनकी रिहाई की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के अधिकारों पर भी सवाल उठाए। अयाली ने कहा कि भारी मतों से जीतने के बावजूद अमृतपाल के सांसद निधि फंड जारी नहीं किए गए हैं और एनएसए हटने के बाद भी उन्हें पंजाब से बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार पर अमृतपाल की संसद जाने वाली याचिका में देरी करने का आरोप लगाया।


कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और प्रशासनिक सुधार की मांग
प्रताप सिंह बाजवा ने सफाई कर्मचारियों, मनरेगा कार्यकर्ताओं और ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग दोहराई। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इस पर ठोस फैसला लिया जाए। इसके अलावा, एक अन्य विधायक ने जमीन के इंतकाल (म्यूटेशन) में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि इंतकाल की प्रक्रिया 30 दिन में पूरी हो और इसकी अंतिम मंजूरी का अधिकार जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नर या जिला राजस्व अधिकारी को दिया जाए, ताकि लोगों को भ्रष्टाचार और परेशानी से मुक्ति मिल सके।


शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में विसंगतियां
सदन में शिक्षकों के वेतन का मुद्दा भी गरमाया रहा। डॉ. सुखी ने बंगा के आदर्श स्कूलों के शिक्षकों की हड़ताल का मामला उठाते हुए कहा कि एसबीएस नगर के दो स्कूलों में शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि अन्य जिलों में ऐसा हो चुका है। वहीं, खन्ना शहर के गंदे पानी की समस्या पर भी चिंता जताई गई। विधायकों ने बताया कि बिना ट्रीट किया गया पानी गांवों की ओर जा रहा है, जिससे फसलें और पेड़ बर्बाद हो रहे हैं और बीमारियां फैल रही हैं। उन्होंने मांग की कि गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।


बुनियादी ढांचा और स्थानीय निकायों में भेदभाव
शून्यकाल के दौरान जालंधर में फ्लाईओवर के गलत डिजाइन और सड़कों पर जलभराव का मुद्दा भी उठा। विधायकों ने मांग की कि जलभराव वाले स्थानों पर इंटरलॉकिंग टाइलें लगाई जाएं। सनौर में टांगरी नदी की सफाई और बांधों की मजबूती के लिए जारी 16 करोड़ रुपये के काम की जांच कराने की भी मांग की गई। इसके अलावा, नगर निगम के विकास कार्यों में फंड के असमान वितरण पर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि कुछ खास वार्डों को ज्यादा पैसा दिया जा रहा है, जबकि बाकी वार्डों की अनदेखी की जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों की बात सुनने के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।

 

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