मानसा। पंजाब के मानसा जिले के गांव बीरेवाला जट्टा स्थित गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के साथ हुई कथित बेअदबी की घटना ने अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले लिया है। शनिवार को विभिन्न पंथक संगठनों और निहंग जत्थेबंदियों ने इस मामले में प्रशासन की ढिलाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के मुख्य तिकोनी चौक पर विशाल धरना दिया और यातायात को पूरी तरह ठप कर दिया। संगठनों की मुख्य मांग है कि इस घृणित कार्य में शामिल असली आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
शहर में यातायात व्यवस्था चरमराई और भारी पुलिस बल तैनात
तिकोनी चौक पर प्रदर्शन और चक्का जाम के कारण मानसा शहर की यातायात व्यवस्था कई घंटों तक अस्त-व्यस्त रही। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। प्रदर्शन के चलते बस अड्डे से विभिन्न शहरों के लिए जाने वाली बसों का रूट बदलना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। पुलिस ने शहर में प्रवेश करने वाले अन्य वाहनों को भी वैकल्पिक रास्तों से निकाला। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहे।
धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और प्रशासन पर ढिलाई का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए निहंग संगठनों के नेताओं ने जिला प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीरेवाला जट्टा के गुरुद्वारा साहिब में १५ जुलाई को बेअदबी का मामला सामने आया था, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस गिरफ्तारी नहीं हुई है। नेताओं का तर्क था कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में त्वरित न्याय होना चाहिए, जबकि प्रशासन लगातार जांच के नाम पर समय मांग रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रंथी की मौत ने मामले में डाला नया मोड़
संगठनों ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि बेअदबी की यह घटना लगभग दो साल पुरानी है। उनके अनुसार, गुरुद्वारा साहिब के तत्कालीन ग्रंथी बलविंदर सिंह ने इस बारे में गुरुद्वारा कमेटी को सूचित किया था। आरोप है कि कमेटी के सदस्यों ने मामले की जांच कराने के बजाय इसे दबाने का दबाव बनाया और संगत से सच्चाई छिपाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक अपमान के बोझ तले दबकर ग्रंथी बलविंदर सिंह ने आत्मघाती कदम उठा लिया। ग्रंथी की मौत के बाद अब यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।
गुरुद्वारा कमेटी की भूमिका पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा कमेटी के खजांची मेवा सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पुलिस ने ग्रंथी के परिजनों की शिकायत पर मेवा सिंह को नामजद तो किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे नाकाफी बता रहे हैं। उनका आरोप है कि कमेटी ने बेअदबी के मुख्य सूत्रधारों को बचाने का प्रयास किया और संगत को गुमराह किया। सिख संगत में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि गुरुद्वारा साहिब के भीतर ही ऐसी घटनाओं को छुपाने का प्रयास किया गया। पंथक संगठनों ने मांग की है कि पूरी कमेटी की भूमिका की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
भविष्य की रणनीति और शांति की अपील
फिलहाल तिकोनी चौक पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और संगठनों ने अपनी मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने का ऐलान किया है। पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और साक्ष्य मिलते ही दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है ताकि क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।