वॉशिंगटन। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना के शीर्ष नेतृत्व ने एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने सैनिकों को आगाह किया है कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए सेलफोन वीडियो और तस्वीरें अनजाने में दुश्मन की मदद कर रहे हैं। विशेष रूप से ईरान इन ऑनलाइन पोस्ट का उपयोग अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों की सफलता या विफलता का आकलन करने के लिए कर रहा है। यह चेतावनी दर्शाती है कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत संचार किस तरह से सैन्य अभियानों की गोपनीयता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सैनिकों के मोबाइल फोन जब्त करने की तैयारी
सुरक्षा की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग एक कठोर कदम उठाने पर विचार कर रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों को जल्द ही अपने मोबाइल फोन जमा करने का आदेश दिया जा सकता है। जॉर्डन जैसे देशों में तैनात कुछ सैन्य टुकड़ियों को पहले ही सूचित कर दिया गया है कि आने वाले दिनों में उनके फोन जब्त किए जा सकते हैं। हालांकि इस फैसले से सैनिकों में मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका है क्योंकि वे अपने परिवार और मित्रों के संपर्क में रहने के लिए इन्हीं उपकरणों का सहारा लेते हैं, लेकिन ‘ऑपरेशनल सिक्योरिटी’ (OPSEC) को प्राथमिकता दी जा रही है।
ईरान को मिल रहा है ‘ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस’ का लाभ
एडमिरल ब्रैड कूपर द्वारा 28 जुलाई को लिखे गए एक आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ईरान किस तरह चतुराई से जानकारी जुटा रहा है। कूपर के अनुसार, जब भी कोई हमला होता है, ईरानी खुफिया तंत्र पत्रकारों की रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और विशेष रूप से सैनिकों द्वारा अपलोड किए गए फुटेज को खंगालता है। इससे उन्हें लगभग ‘रियल-टाइम’ (उसी समय) में पता चल जाता है कि उनकी मिसाइल या ड्रोन ने लक्ष्य को भेदा है या नहीं। कूपर ने जोर देकर कहा कि इस ‘ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस’ की भारी कीमत खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों और निर्दोष नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
डिजिटल निगरानी और सैन्य जैमिंग के बीच संघर्ष
आमतौर पर युद्ध क्षेत्रों में अमेरिकी सेना उन्नत ‘इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग’ और अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग करती है ताकि दुश्मन उनके ठिकानों की सटीक स्थिति का पता न लगा सके। लेकिन सैनिकों द्वारा फोन का उपयोग इन सभी सुरक्षा घेरों को कमजोर कर देता है। जब कोई सैनिक अपनी लोकेशन या हमले के बाद की स्थिति का वीडियो साझा करता है, तो वह जैमिंग के प्रभाव को शून्य कर देता है। चेतावनी में कहा गया है कि सैनिकों को अपनी ‘ऑपरेशनल सिक्योरिटी’ पर ध्यान दोगुना करना होगा। इस मेमो ने आधुनिक युद्ध की रिपोर्टिंग और सैन्य गोपनीयता के बीच के बढ़ते फासले को भी उजागर कर दिया है।
सैनिकों और परिवारों के बीच संचार का संकट
यदि मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह इस क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए एक नया संघर्ष पैदा करेगा। वर्तमान में तैनात सैनिक नियमित रूप से अपने परिजनों को संदेश भेजकर अपनी कुशलता की जानकारी देते हैं। संचार के इन साधनों पर रोक लगने से उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच एक बड़ा संतुलन बनाना होगा। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि जानकारी इसी तरह लीक होती रही, तो भविष्य में अमेरिकी सेना को और अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन फोन की जब्ती और सीमित उपयोग के बीच के विकल्पों पर गंभीरता से मंथन कर रहा है।
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