Uttarakhand: बदरीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी मामले में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को पुलिस ने दबोचा

देहरादून। बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए दान और चढ़ावे की गणना में हुई धांधली के मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। शुक्रवार को बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को लंबी पूछताछ के बाद आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। उल्लेखनीय है कि चौहान अभी हाल ही में 30 जून को अपनी सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है, जिसने मंदिर प्रबंधन के भीतर चल रही कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी उनके रिटायरमेंट के महज 17 दिन बाद हुई है। जांच शुरू होने के बाद से ही एसआईटी उनकी भूमिका पर लगातार नजर बनाए हुए थी। शुक्रवार को उन्हें बद्रीनाथ थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लगभग चार घंटों तक चली इस सघन पूछताछ के दौरान जब उनके बयानों का मिलान घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य कर्मचारियों के पूर्व में दर्ज बयानों से किया गया, तो भारी विसंगतियां पाई गईं। साक्ष्यों के आधार पर संतोषजनक उत्तर न मिलने और प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने के कारण जांच टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।

अब तक इस प्रकरण में तीन प्रमुख व्यक्तियों पर सीधी गाज गिरी है। प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र सिंह चौहान जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, जबकि दान की गणना करने वाले खजांची संदेश मेहता को उनकी संदिग्ध भूमिका और लापरवाही के कारण पद से हटाया जा चुका है। एसआईटी अब तीन अन्य विभागीय कर्मचारियों के साथ-साथ एक बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही है।

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। एक निजी कंपनी (जेपी कंपनी) से जुड़ा व्यक्ति, जो अलकनंदा नदी का जलस्तर मापने का काम करता था, वह भी इस षड्यंत्र के रडार पर आ गया है। सूत्रों का कहना है कि यह व्यक्ति 22 जून, 25 जून, 28 जून और 2 जुलाई को चढ़ावा गणना कक्ष में मौजूद था। सीसीटीवी फुटेज में उसे सिक्कों की छंटाई करते हुए पाया गया है। एसआईटी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि एक बाहरी व्यक्ति को इतने संवेदनशील और सुरक्षित कक्ष में प्रवेश की अनुमति किस आधार पर मिली और उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।

भविष्य की रणनीति को लेकर एसआईटी अब आक्रामक रुख अपना रही है। पहले से ही न्यायिक हिरासत में मौजूद प्रमोद नौटियाल को पुलिस रिमांड पर लेने के लिए जल्द ही अदालत में अर्जी दाखिल की जाएगी। पुलिस की योजना है कि नौटियाल और राजेंद्र सिंह चौहान को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाए ताकि यह पता चल सके कि चढ़ावे की हेराफेरी का यह खेल कब से चल रहा था और इसमें और कौन-कौन से सफेदपोश चेहरे शामिल हैं।

दूसरी ओर, बीकेटीसी द्वारा गठित चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। 18 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावा कक्ष की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया में गंभीर कमियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कर्मचारियों के लिए एकसमान ड्रेस कोड, अनिवार्य पहचान पत्र और चढ़ावा कक्ष में बाहरी हस्तक्षेप रोकने की सिफारिश की गई है। यह पूरा मामला 2 जुलाई को तब उजागर हुआ था जब भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने चढ़ावे में हेराफेरी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद से ही शासन और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने के लिए सक्रिय हैं।

 

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