देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय में देश की जानी-मानी साहित्यकार और भारत-जर्मनी के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रही योजना साह जैन से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान लेखिका ने मुख्यमंत्री को अपनी हालिया साहित्यिक कृतियां भेंट कीं और दोनों के बीच साहित्य एवं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विनिमय के महत्व पर सार्थक बातचीत हुई।
योजना साह जैन ने अपनी तीन प्रमुख पुस्तकें मुख्यमंत्री को समर्पित कीं। इनमें उनका कहानी-संग्रह ‘इमली का चटकारा’, प्रसिद्ध उपन्यास ‘बनारस मीट्स बर्लिन’ और कविता-संग्रह ‘कागज पे फुदकती गिलहरियां’ शामिल हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से लेखिका ने भारतीय संवेदनाओं, लोकजीवन और दो देशों के बीच के सांस्कृतिक अनुभवों को बड़ी ही खूबसूरती से पिरोया है। मुख्यमंत्री ने इन कृतियों को स्वीकार करते हुए लेखिका के प्रयासों और उनके लेखन की सराहना की।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना साह जैन को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं होता, बल्कि यह समाज के मूल्यों, हमारी साझा संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री का मानना है कि एक श्रेष्ठ साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।
विशेष रूप से इंडो-जर्मन संबंधों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने योजना साह जैन के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देने में लेखिका का योगदान सराहनीय है। उनके उपन्यास ‘बनारस मीट्स बर्लिन’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कृतियां वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और लोकजीवन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय पाठकों को भारत की गहराई समझने में मदद मिलती है, बल्कि दोनों देशों के बीच के मैत्रीपूर्ण संबंध भी और अधिक प्रगाढ़ होते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि भविष्य में भी योजना साह जैन अपनी लेखनी के माध्यम से इसी तरह भारतीय समाज की संवेदनाओं को वैश्विक पटल पर रखती रहेंगी। उन्होंने कहा कि देवभूमि के रचनाकारों का वैश्विक स्तर पर पहचान बनाना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। इस भेंट के दौरान उत्तराखंड की साहित्यिक गतिविधियों और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई।