सहसपुर (देहरादून)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सहसपुर स्थित गुरु रामराय पब्लिक स्कूल में ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविर में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य संकल्प शासन-प्रशासन को सीधे जनता के बीच ले जाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता है कि आम नागरिकों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट न खटखटानी पड़े, बल्कि सरकार खुद चलकर उनके पास आए और मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे ऊपर होती है और एक संवेदनशील प्रशासन वही है जो जनता के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने बताया कि इस अभियान के पहले चरण में राज्यभर में करीब 700 शिविर लगाए गए, जिसमें 5 लाख से अधिक लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अकेले देहरादून जिले में ही 46 शिविरों के जरिए लगभग 39 हजार लोगों को मौके पर ही सरकारी सेवाओं का लाभ प्रदान किया गया। वर्तमान में चल रहे सेवा पखवाड़े में अब तक प्राप्त 5,567 शिकायतों में से 4,951 का निस्तारण किया जा चुका है, जो सरकार की कार्यकुशलता को दर्शाता है।
सहसपुर के इस शिविर में 1000 से अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण कराया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य आज सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाने जैसी ऐतिहासिक पहल उत्तराखंड में ही हुई हैं। नकल विरोधी कानून के कारण ही राज्य के 34 हजार से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां मिली हैं।
मुख्यमंत्री ने शिविर में न केवल भाषण दिया, बल्कि जनता की समस्याओं को सुनकर मौके पर ही अधिकारियों को समयबद्ध समाधान के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी कार्य में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।