Uttarakhand: देहरादून में लोक संवर्धन पर्व का भव्य आगाज उत्तराखंड बना केंद्र के साथ साझेदारी करने वाला पहला राज्य

देहरादून। राजधानी देहरादून का ऐतिहासिक परेड ग्राउंड शनिवार को भारत की बहुरंगी संस्कृति और समृद्ध हस्तशिल्प के रंगों से सराबोर हो उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से छठे ‘लोक संवर्धन पर्व’ का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। 11 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस पांच दिवसीय महोत्सव ने देहरादून को एक लघु भारत के रूप में बदल दिया है, जहां देश भर के कोने-कोने से आए शिल्पकार, बुनकर और कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उत्तराखंड इस महोत्सव में केंद्रीय मंत्रालय के साथ आधिकारिक साझीदार बनने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री धामी और केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। परेड ग्राउंड में लगे 150 से अधिक स्टॉलों पर भारत की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और लजीज व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इनमें उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को विशेष स्थान दिया गया है, ताकि देवभूमि की कला को वैश्विक पहचान मिल सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के लिए यह गौरवशाली क्षण है कि उसने केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस राष्ट्रीय उत्सव की मेजबानी की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी लुप्त हो रही कलाओं को पुनर्जीवित करते हैं, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और हस्तशिल्पियों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलते हुए समाज के हर वर्ग, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ और ‘एक जनपद दो उत्पाद’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के उत्पादों की ब्रांडिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोक संवर्धन पर्व को भारत की सांस्कृतिक एकता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार और नई पहचान दिलाना है। रिजिजू ने उत्तराखंड सरकार की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की विकासोन्मुखी सोच और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण ही यह आयोजन इतना भव्य और सफल हो पाया है।

इस महोत्सव में शिल्पकारों के साथ-साथ लोक कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का साझा मंच मिला है। उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों के हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान और हाथ से बनी कलाकृतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, भारत सरकार के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, उत्तराखंड के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों और पर्यटकों से अपील की कि वे इस मेले में आएं और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को साकार करते हुए स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें।

 

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