नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को देश के विभिन्न हिस्सों के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। कई क्षेत्रों में आंधी-तूफान के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। जहां एक ओर देश के बड़े हिस्से में बादल बरसेंगे, वहीं दूसरी ओर राजस्थान जैसे राज्यों में आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां सुस्त रह सकती हैं, जिससे वहां आगामी सप्ताह शुष्क रहने की आशंका है।
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में भी तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
राजधानी दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्रों में आगामी दिनों में छिटपुट बारिश का सिलसिला बना रहेगा। हालांकि, सोमवार के लिए दिल्ली में भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। हिमालयी राज्यों में मानसून की सक्रियता बरकरार रहेगी, जिससे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके विपरीत, राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूल भरी हवाएं चल सकती हैं, लेकिन बारिश की गतिविधियां सामान्य से काफी कम रहने की उम्मीद है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो बिहार में मानसून के फिर से जोर पकड़ने की संभावना है। सिक्किम और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भी अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। पूर्वोत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में व्यापक वर्षा का दौर जारी रहने की उम्मीद है। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रहेगा।
मौसम की इस लुकाछिपी के बीच देश में बारिश के आंकड़ों को लेकर चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है। एक सप्ताह की अच्छी बारिश के बाद मानसून की रफ्तार दोबारा धीमी पड़ने से बारिश का घाटा बढ़ गया है। जून के अंत तक जो घाटा 40 प्रतिशत था, वह 9 जुलाई तक घटकर 14 प्रतिशत रह गया था, लेकिन हाल के सूखे दौर के कारण रविवार तक यह फिर से बढ़कर 18 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
बारिश की इस कमी का सबसे सीधा और बुरा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। देश के मुख्य मानसूनी कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के साधनों की कमी के कारण खेती पूरी तरह से मौसमी बारिश पर निर्भर है। वर्तमान सूखे दौर की वजह से खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। आंकड़ों के अनुसार, बिहार, झारखंड, पंजाब और गुजरात सहित 15 राज्यों में मानसून की संचयी बारिश में 20 से 73 प्रतिशत तक की भारी कमी देखी गई है। विशेष रूप से पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 37 प्रतिशत का बड़ा घाटा दर्ज किया गया है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मानसून के घाटे का मुख्य विवरण
1 जून से 12 जुलाई के बीच देश में कुल बारिश का घाटा बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे अधिक 37 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
पंजाब, गुजरात, केरल और तेलंगाना सहित 15 राज्यों में बारिश सामान्य से 20 से 73 प्रतिशत कम रही।
सूखे दौर के कारण मुख्य फसलों की बुआई का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम दर्ज किया गया है।
आईएमडी ने आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान लगाया है।
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