शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्य के जलशक्ति विभाग द्वारा तैयार किए गए एक महत्वपूर्ण और व्यापक संकलन ‘वाटर लाज आफ हिमाचल प्रदेश’ का विमोचन किया। यह प्रदेश के इतिहास में अपनी तरह का पहला ऐसा दस्तावेज है, जिसमें जल प्रबंधन से जुड़े सभी प्रमुख अधिनियमों, नियमों, नीतिगत सूचनाओं, तकनीकी नियमावलियों और प्रशासनिक परिपत्रों को एक साथ एक ही पुस्तक में समाहित किया गया है।
इस संकलन का संपादन और संकलन जलशक्ति विभाग के प्रधान सचिव अभिषेक जैन, शिमला जोन के मुख्य अभियंता मुकेश हीरा और शिमला जोन के ही अधीक्षण अभियंता विजय कश्यप द्वारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रकाशन अधिकारियों, अभियंताओं, ठेकेदारों और आम नागरिकों के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कदम से राज्य भर में जलापूर्ति, सीवरेज और सिंचाई सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता में व्यापक सुधार होगा।
प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में आएगी सुगमता
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जलशक्ति विभाग द्वारा दशकों से विकसित किए गए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक प्रावधानों को एक जगह संकलित करना विभाग की बड़ी उपलब्धि है। यह संकलन विशेष रूप से विभिन्न डिवीजनों, सर्किलों और जोनों में तैनात अधिकारियों के लिए संस्थागत संदर्भों को मजबूत करेगा और उन्हें सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा। अक्सर नियमों की स्पष्टता न होने के कारण क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब यह पुस्तक एक मार्गदर्शक के रूप में उपलब्ध होगी।
यह संकलन विभिन्न विषयों के आधार पर विभाजित किया गया है, जिसमें अधिनियम और नीतियां, परिचालन दिशा-निर्देश, जल शुल्क, वित्तीय शक्तियां, निविदा प्रक्रियाएं, कानूनी मामले, मुकदमेबाजी, जल गुणवत्ता परीक्षण और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषय शामिल हैं। यह प्रकाशन विभाग के कानूनी और प्रक्रियात्मक ढांचे को समझने के लिए ‘सिंगल-विंडो संदर्भ’ प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल की उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक बनकर उभरा है। हिमाचल ने 99.9 प्रतिशत घरों तक नल से जल पहुंचाने का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया है। सतत जल प्रबंधन और सार्वजनिक सेवा वितरण के प्रति राज्य की इसी प्रतिबद्धता के कारण हिमाचल को वर्ष 2026 का राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।
सभी वर्गों को होगा लाभ
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संकलन से केवल सरकारी अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अन्य हितधारकों को भी बड़ा लाभ होगा। ठेकेदारों को नामांकन मानदंडों, निविदा प्रक्रियाओं और वित्तीय शक्तियों के बारे में अधिक स्पष्टता मिलेगी। वहीं, आम नागरिकों को जल शुल्क, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत मिलने वाली सेवाओं और जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, जलशक्ति विभाग के प्रधान सचिव अभिषेक जैन, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह पहल सुशासन को मजबूत करने, सेवा वितरण में सुधार करने और विभाग के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने में योगदान देगी।