Uttarpradesh: यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला शाहजहांपुर का जलालाबाद अब कहलाएगा परशुराम पुरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में कुल 29 प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई, जिनमें सबसे प्रमुख शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर ‘परशुराम पुरी’ करने का निर्णय रहा। इसके साथ ही प्रदेश में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी। कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब यह कस्बा अपनी नई पहचान ‘परशुराम पुरी’ के रूप में जानेगा। नाम बदलने की इस कवायद की शुरुआत मार्च 2018 में हुई थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। यहां भगवान परशुराम का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जिसके प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। इसी महत्व को देखते हुए सरकार ने साल 2022 में इसे आधिकारिक तौर पर भगवान परशुराम की जन्मभूमि घोषित किया था।

नाम परिवर्तन का सफर और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जलालाबाद के नाम को बदलने का प्रस्ताव शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और फिर सितंबर 2023 की बोर्ड बैठकों में पारित किया था। तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की संस्तुति के बाद प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा था। केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2025 को राज्य के इस प्रस्ताव को अपनी सहमति दे दी थी, जिसे अब राज्य कैबिनेट ने औपचारिक रूप से पास कर दिया है।

ऐतिहासिक तर्कों के अनुसार, इस तहसील का नाम मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में ‘जलालाबाद’ रखा गया था। हालांकि, पौराणिक ग्रंथों में इस स्थान का वर्णन भगवान परशुराम की जन्मभूमि के रूप में होने के कारण स्थानीय स्तर पर लंबे समय से नाम बदलने की मांग की जा रही थी।

नवाचार को मिलेगी नई उड़ान: स्टार्टअप नीति-2026
कैबिनेट बैठक में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ को स्वीकृति दी गई है। अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहने वाली इस नीति का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के शीर्ष स्टार्टअप ईकोसिस्टम वाले राज्यों की श्रेणी में अग्रणी बनाना है। इस नीति के जरिए युवाओं को उद्यमिता के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा और राज्य में निवेश के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

नई स्टार्टअप नीति में हाईटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती दौर से लेकर उनके विस्तार तक के लिए व्यापक वित्तीय मदद और संस्थागत सहयोग देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि इस नीति के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक सशक्त मंच मिले।

 

Pls read:Uttarpradesh: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट की आपात बैठक कल चंपतराय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर होगा फैसला

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *