Pakistan: अफगान सीमा पर पाक सुरक्षा बलों का बड़ा प्रहार, 29 आतंकवादियों का सफाया

इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक अत्यंत आक्रामक और निर्णायक सैन्य अभियान को अंजाम दिया है। खुफिया विभाग से मिली सटीक और पुख्ता सूचनाओं के आधार पर चलाए गए इस जमीनी व हवाई अभियान में कुल 29 उग्रवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी गतिविधियों में अचानक तेजी देखी गई है। सेना ने इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय और रणनीतिक तरीके से अंजाम दिया ताकि सीमा पार छिपे चरमपंथियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

समाचार एजेंसी एपी के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के संवेदनशील इलाकों को चारों ओर से घेर लिया। अभियान की शुरुआत में विशेष कमांडो दस्ते ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला और उग्रवादियों की पनाहगाहों की पहचान की। इसके तुरंत बाद, चिह्नित ठिकानों पर ‘कैलिब्रेटेड स्ट्राइक’ यानी अत्यंत सटीक हवाई हमले किए गए। सेना की इस कार्रवाई में आतंकवादियों के कई भूमिगत बंकर और हथियार डिपो पूरी तरह तबाह हो गए।

कराची हमले का करारा जवाब
यह बड़ी सैन्य कार्रवाई कराची में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के ठीक 24 घंटे बाद सामने आई है। ज्ञात हो कि शनिवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कराची स्थित ‘सिंध रेंजर्स कंपाउंड’ पर हुए एक बड़े हमले को नाकाम किया था। उस दौरान हुई खूनी मुठभेड़ में चार रेंजर्स जवान शहीद हो गए थे, जबकि जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने छह आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया था। रविवार को सीमा पर की गई कार्रवाई को इसी हमले के प्रतिशोध और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के रूप में देखा जा रहा है।

ऑपरेशन की मुख्य विशेषताएं और परिणाम

  • सटीक खुफिया जानकारी: अभियान पूरी तरह से इंटेलिजेंस इनपुट पर आधारित था, जिससे आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

  • हवाई और जमीनी तालमेल: पहले थल सेना ने घेराबंदी की और फिर वायु सेना ने सटीक बमबारी कर उग्रवादियों के रसद आपूर्ति तंत्र को काट दिया।

  • आतंकियों का सफाया: इस एक दिन के ऑपरेशन में 29 खतरनाक आतंकवादियों को खत्म करने में सफलता मिली।

  • ठिकानों की तबाही: सीमा के निकट स्थित कई सक्रिय लॉन्च पैड और ट्रेनिंग सेंटरों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।

सीमा पार आतंकवाद पर गहराया विवाद
ताजा सैन्य अभियान ने एक बार फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक कड़वाहट को उजागर कर दिया है। इस्लामाबाद प्रशासन पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा करता रहा है कि अफगानिस्तान की वर्तमान तालिबान सरकार ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (टीटीपी) के उग्रवादियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करा रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि ये आतंकी अफगान धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों को निशाना बना रहे हैं।

हालांकि, काबुल में बैठी तालिबान सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। अफगानिस्तान का कहना है कि उनकी धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जा रहा है और पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मामले उनकी अपनी विफलता का परिणाम हैं। आरोपों-प्रत्यारोपों के इस दौर के बीच सीमा पर हुई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, सुरक्षा बल देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और हमले पूरी तरह बंद नहीं हो जाते, तब तक इस तरह के सर्च ऑपरेशन और सर्जिकल स्ट्राइक जारी रहेंगी। फिलहाल, सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और किसी भी संभावित जवाबी हमले को देखते हुए हाई अलर्ट घोषित किया गया है। स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि आने वाले दिनों में सैन्य हलचल और बढ़ने की आशंका है।

 

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