Himachal: लोक निर्माण विभाग अब सड़कों के साथ बांधों का भी करेगा निर्माण

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नॉर्दन जोनल काउंसिल की बैठक के दौरान राज्य के विकास को लेकर एक दूरगामी विजन साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश का लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में विभाग की भूमिका का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब यह विभाग बांधों और अन्य महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में भी सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाएगा। यह महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री ने शिमला के पीटरहॉफ होटल में आयोजित नॉर्दर्न जोन काउंसिल की बैठक के दूसरे दिन ‘इंटर-स्टेट इंटरेक्टिव सत्र’ के दौरान की।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और दूरदराज के क्षेत्रों की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि हिमाचल के कई ऐसे दुर्गम इलाके हैं, जहां आज भी सड़कों की पहुंच नहीं हो पाई है। ऐसे पिछड़े गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए सरकार एक विशेष और प्रभावी नीति तैयार करने जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन परियोजनाओं के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और विशेष बजटीय प्रावधानों के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि सड़क संपर्क केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक उत्थान की बुनियादी सीढ़ी है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का एक भी गांव सड़क सुविधा से वंचित न रहे और इसके लिए जरूरत पड़ने पर नई और बड़ी परियोजनाओं को भी शुरू किया जाएगा।

इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने उत्तर भारतीय राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि नॉर्दन जोन के सभी राज्यों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक एकीकृत और समन्वित कार्ययोजना बनानी चाहिए। विक्रमादित्य सिंह ने तर्क दिया कि पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं, इसलिए एक साझा रणनीति अपनाकर बेहतर और टिकाऊ परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

तकनीकी नवाचारों का जिक्र करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी कि लोक निर्माण विभाग अब आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, पारदर्शिता लाने और कार्यों की गति बढ़ाने के लिए विभाग अब ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI) का उपयोग करेगा। उन्होंने कहा कि सड़कों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण निर्माणों में अत्याधुनिक तकनीकों के प्रयोग से न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि समय की भी बचत होगी। इसके साथ ही, भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए विभाग अपने तकनीकी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बना रहा है। परियोजनाओं की पल-पल की जानकारी और प्रभावी ट्रैकिंग के लिए ‘डिजिटल निगरानी प्रणाली’ को भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा, जिससे वास्तविक समय में प्रगति की समीक्षा की जा सकेगी।

शिमला के ऐतिहासिक पीटरहॉफ में आयोजित इस उच्च स्तरीय सत्र में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान राज्यों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने, तकनीकी आदान-प्रदान और आधारभूत ढांचे को आधुनिक बनाने जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री के इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश अब अपने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और नई कार्यशैली को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में लोक निर्माण विभाग का यह नया स्वरूप राज्य की अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

 

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