Himachal: हिमाचल में सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों को मिलेगा एनपीए और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए खर्च होंगे तीन हजार करोड़

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि प्रदेश सरकार सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों को ‘नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस’ (NPA) प्रदान करेगी। यह कदम राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में उच्च योग्यता प्राप्त विशेषज्ञों को प्रोत्साहित करने और उनकी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है। मुख्यमंत्री वीरवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को उनके अपने राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण और अभिनव पहल की हैं, जिनके अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं।

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि स्वास्थ्य सुधारों को लेकर वे लगातार डॉक्टरों के साथ संवाद कर रहे हैं। आने वाले महीनों में वे स्वयं विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा करेंगे और वहां कार्यरत डॉक्टरों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में भविष्य के सुधारों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को नई दिल्ली स्थित एम्स के स्तर पर विकसित किया जा रहा है। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति के साथ-साथ वहां अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक और निवेश पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक चिकित्सा मशीनों और उपकरणों की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। जिन जिलों में वर्तमान में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां के क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों की सुविधाओं को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि उन क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की कमी को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर भर्तियां की जा रही हैं।

सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अब रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू हो चुकी है, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिल रहा है। पहले इस तरह की उन्नत तकनीक का लाभ उठाने के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाना पड़ता था और भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती थी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) को जनसंख्या कवरेज के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाए। इससे वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार वहां कर्मचारी और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आसान होगा और लोगों को उनके घर के समीप ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।

इस समीक्षा बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव अश्वनी कुमार शर्मा, जितेंद्र संजता, एनएचएम के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर, हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंघल सहित विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देशित किया कि भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि चिकित्सा सेवाओं में निरंतरता बनी रहे।

 

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