चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में इस समय बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ सीधे तौर पर राजनीतिक और धार्मिक मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए एक महीने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने घोषणा की कि यदि 19 जुलाई तक भगवंत मान को उनके पद से नहीं हटाया गया, तो अकाली दल पूरे राज्य में ‘धर्म युद्ध मोर्चा’ शुरू करेगा। इस मुहिम को धार देने के लिए पार्टी ने पांच सदस्यीय एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है।
यह समिति आने वाले दिनों में संत समाज, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं, सिख संगठनों और सामाजिक इकाइयों से संपर्क साधेगी ताकि मुख्यमंत्री के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा किया जा सके। सुखबीर बादल ने जोर देकर कहा कि सिख कौम के लिए श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है और इसकी मर्यादा व आदेशों के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान ने अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेशों को बेहद हल्के में लिया है और उनकी अवहेलना की है, जिससे समूचे सिख जगत की भावनाएं गहरी आहत हुई हैं।
विवादित वीडियो मामले पर विस्तार से बात करते हुए सुखबीर बादल ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भगवंत मान के ही पूर्व करीबी साथी जगमन समरा ने इस वीडियो को सार्वजनिक किया था। बादल ने पूरी घटनाक्रम की समयसीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 2025 को इस मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई और महज 24 घंटे के भीतर इसे अदालत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा तैयार किया गया फर्जी वीडियो करार दे दिया गया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यदि वीडियो वास्तव में फर्जी था और उसमें मुख्यमंत्री नहीं थे, तो सरकार ने इतनी हड़बड़ी में कानूनी कार्रवाई और अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया।
अकाली दल के अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भगवंत मान का विवादों से पुराना नाता रहा है और उन पर पहले भी धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जब से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, राज्य में बेअदबी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो सरकार की विफलता और मंशा पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक भगवंत मान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे, शिरोमणि अकाली दल का कोई भी विधायक विधानसभा की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेगा और सदन का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
सुखबीर बादल ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी लैब रिपोर्ट आना अपने आप में संदेहास्पद है और दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। बादल ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जानकारी दी कि अकाली दल का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात करेगा और इस मामले में गहन छानबीन की मांग करेगा। बादल ने अन्य राजनीतिक दलों से भी आह्वान किया कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों और धार्मिक मर्यादा की रक्षा के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ खड़े हों। फिलहाल, 19 जुलाई की समयसीमा ने पंजाब सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश कर दी है।