WB: तृणमूल कांग्रेस में मची भगदड़ के बीच बाबुल सुप्रियो ने अपनी राजनीतिक स्थिति पर दी सफाई

नई दिल्ली। बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहरा संकट पैदा हो गया है। पार्टी के विधायकों और सांसदों का साथ छोड़ने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी उथल-पुथल के बीच टीएमसी के राज्यसभा सांसद और कभी बंगाल में भाजपा का प्रमुख चेहरा रहे बाबुल सुप्रियो ने उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें उनके पाला बदलने की बात कही जा रही थी। सुप्रियो ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में अपनी पार्टी और नेतृत्व के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।

55 वर्षीय सुप्रियो ने फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे मीडिया की ओर से आने वाले उन कॉलों से काफी थक चुके हैं, जिनमें बार-बार उनसे उनकी भविष्य की रणनीति पूछी जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि वे ठीक वहीं हैं जहाँ उन्हें होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने भाजपा को मिले भारी जनादेश को स्वीकार किया है, जिसे ममता बनर्जी और उनके वफादार अब तक मानने को तैयार नहीं हैं और चुनाव में धांधली का आरोप लगा रहे हैं।

राजनीतिक समीकरणों की ओर संकेत करते हुए सुप्रियो ने कहा कि वे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे विकास कार्यों के लिए सांसदों को मिलने वाले 5 करोड़ रुपये के फंड (एमपीलैड) का उचित उपयोग करेंगे। अधिकारी की ओर बढ़ाए गए उनके इस मैत्रीपूर्ण व्यवहार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सकारात्मक रुख को उनकी पूर्व पार्टी के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सुप्रियो ने अपनी पोस्ट में टीएमसी के भीतर मौजूद अपने विरोधियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने 2015 के चर्चित ‘झालमुड़ी प्रकरण’ को याद करते हुए कहा कि उस समय उनकी अपनी ही पार्टी के कई लोगों ने उनके प्रति बहुत क्रूर व्यवहार किया था। उस दौरान सुप्रियो भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री थे, लेकिन ममता बनर्जी के साथ एक कार्यक्रम में झालमुड़ी साझा करने पर उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। उन्होंने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 और 2019 में आसनसोल लोकसभा सीट जीतने के बाद उन्होंने वहां के विकास के लिए काफी काम किया और मेट्रो परियोजनाओं की जटिलताओं को सुलझाया।

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए सुप्रियो ने कहा कि हार के बाद जिस तरह से लोग अचानक ‘ज्ञान’ प्राप्त कर पाला बदल रहे हैं, वह काफी मनोरंजक और हास्यास्पद है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति का पक्ष नहीं लेंगे जिसने सार्वजनिक धन की चोरी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्ट लोगों का असली स्थान जेल है।

वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस एक बड़े बिखराव के दौर से गुजर रही है। पिछले 15 वर्षों तक राज्य में दबदबा बनाए रखने वाली पार्टी अब महज 80 सीटों पर सिमट गई है। पार्टी के 28 में से 20 सांसद अब भाजपा के नेतृत्व वाले गुट के साथ जुड़ने की तैयारी में हैं, जिनमें शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे बड़े नाम शामिल हैं। बाबुल सुप्रियो ने फिलहाल दिल्ली जाने की किसी भी योजना से इनकार किया है और कहा है कि वे मानसून सत्र की शुरुआत तक अपनी सक्रियता बनाए रखेंगे। बंगाल के इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य ने राज्य की सत्ता के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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