देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में 11 और 12 जून को दालचीनी पर आधारित एक विशेष अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में इस दो दिवसीय संगोष्ठी की विस्तृत जानकारी साझा की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे अधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का ऐतिहासिक गौरव हासिल करने पर बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
गणेश जोशी ने बताया कि सेलाकुई स्थित सगन्ध पौधा केंद्र (कैप) का नाम बदलकर अब ‘परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान’ कर दिया गया है। यह संस्थान एरोमैटिक यानी सुगंधित पौधों के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी केंद्र बनकर उभरा है, जो खेती, प्रसंस्करण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और व्यवसायीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। पिछले दो दशकों में संस्थान के प्रयासों से उत्तराखंड में लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित पौधों की खेती का विस्तार हुआ है। वर्तमान में राज्य के 109 एरोमा क्लस्टरों में करीब 29 हजार किसान इस क्षेत्र से जुड़े हैं और राज्य में 200 से अधिक फील्ड डिस्टीलेशन यूनिट्स स्थापित की जा चुकी हैं। यह इस क्षेत्र की बड़ी सफलता है कि साल 2003 में जहाँ सुगंधित पौधों के सेक्टर का टर्नओवर मात्र 2 करोड़ रुपये था, वह 2025 तक बढ़कर 100 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है।
राज्य में सुगंधित खेती की बढ़ती सफलता और स्वीकार्यता को देखते हुए सरकार ने ‘महक क्रांति नीति 2026’ लागू की है। इस नीति का लक्ष्य राज्य की 23 हजार हेक्टेयर भूमि को सुगंधित खेती के दायरे में लाना और 91 हजार किसानों को इसका सीधा लाभ पहुँचाना है। इसके तहत राज्य में सात एरोमा वैलियां विकसित की जा रही हैं। इसी योजना के अंतर्गत चम्पावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सिनेमन वैली’ यानी दालचीनी घाटी का विकास किया जा रहा है, जो किसानों, उद्यमियों और स्थानीय उद्योगों के लिए समृद्धि के नए अवसर पैदा करेगी।
आगामी 11 और 12 जून को होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का विषय “दालचीनी: प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” रखा गया है। यह आयोजन उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महक क्रांति नीति 2026-36’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य दालचीनी की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना, किसानों को उन्नत तकनीकों और वैश्विक अनुभवों से परिचित कराना तथा अनुसंधान, उद्योग और कृषकों के बीच समन्वय स्थापित करना है। सेमिनार के जरिए गुणवत्ता आधारित उत्पादन, खाद्य सुरक्षा मानकों और निर्यात की जरूरतों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी ताकि उत्तराखंड को दालचीनी उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में वैश्विक पहचान दिलाई जा सके।
इस सेमिनार में दालचीनी से संबंधित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इनमें श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के विशेषज्ञ, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स के निदेशक और इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के विशेषज्ञ प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा भारत के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ, 40 प्रतिनिधिमंडल और 50 प्रगतिशील किसान भी इस चर्चा का हिस्सा बनेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान संस्थान के निदेशक नृपेन्द्र चौहान भी उपस्थित रहे। यह आयोजन उत्तराखंड की कृषि और आर्थिकी को एक नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।
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