देहरादून। उत्तराखंड की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति को और अधिक सशक्त बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसी क्रम में नव नियुक्त उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण कर लिया। देहरादून स्थित कार्यालय में पदभार संभालने के दौरान आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।
पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद रघुवीर सिंह भण्डारी ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से एक अत्यंत संवेदनशील राज्य है, इसलिए यहां के आपदा प्रबंधन तंत्र को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण रणनीति साझा करते हुए कहा कि उनकी मुख्य प्राथमिकता राज्य के पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवानों को आपदा प्रबंधन के ढांचे से जोड़ने की होगी। भण्डारी के अनुसार, उत्तराखंड के लगभग हर गांव में पूर्व सैनिक निवास करते हैं। इन जवानों के पास सेना का कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और मैदानी अनुभव होता है, जो आपदा के समय खोज, बचाव कार्यों और सामुदायिक स्तर पर राहत पहुंचाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक आपदा की तैयारियों को मजबूत करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसमें समुदाय आधारित प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि आपदा के दौरान तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। भण्डारी का लक्ष्य है कि पूर्व सैनिकों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाए।
इस मौके पर सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि रघुवीर सिंह भण्डारी का सेना में लंबा और शानदार अनुभव रहा है। उनके प्रशासनिक और सैन्य कौशल का लाभ निश्चित रूप से उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मिलेगा। उनके मार्गदर्शन में विभाग की नई पहलें और अधिक सक्रियता के साथ आगे बढ़ेंगी। विभाग को उम्मीद है कि उनके अनुभवों से खोज और बचाव कार्यों की तकनीक में और सुधार आएगा।
रघुवीर सिंह भण्डारी का सैन्य करियर अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने भारतीय सेना में लगभग 38 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने लद्दाख स्काउट रेजीमेंटल सेंटर लेह, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडाउन, मराठा रेजीमेंट और नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। इतना ही नहीं, उन्होंने श्रीलंका में चले ‘ऑपरेशन पवन’, सियाचिन ग्लेशियर के ‘ऑपरेशन मेघदूत’ और कारगिल युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन विजय’ में भी अपनी वीरता का परिचय दिया है।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे। वे उत्तराखंड पूर्व सैनिक एवं अर्धसैनिक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक के रूप में लगातार काम करते रहे हैं। उनके इस गहरे सांगठनिक अनुभव से अब उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन तंत्र को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि सेना के अनुशासन और आपदा प्रबंधन की आधुनिक तकनीक का मेल राज्य के लिए जीवनरक्षक साबित होगा।