नई दिल्ली। मध्य पूर्व के सुलगते हालातों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान नीति को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। हाल ही में दोनों वैश्विक नेताओं के बीच हुई एक घंटे की लंबी टेलीफोनिक बातचीत काफी तनावपूर्ण रही। जहां ट्रंप ईरान के साथ एक नई डील के माध्यम से युद्ध को टालने और कूटनीति को मौका देने के पक्ष में हैं, वहीं नेतन्याहू ईरान के खिलाफ तत्काल और आक्रामक सैन्य कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं।
सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप भले ही यह दावा करते रहे हों कि उनके और नेतन्याहू के संबंध बहुत अच्छे हैं और इजरायली प्रधानमंत्री वही करेंगे जो ट्रंप चाहेंगे, लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फोन पर हुई इस गर्मागर्म बहस के दौरान नेतन्याहू ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले तुरंत शुरू करने का दबाव बनाया। उन्होंने ट्रंप को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि सैन्य कार्रवाई में देरी करना एक “बड़ी भूल” साबित होगी। नेतन्याहू का मानना है कि तेहरान की सैन्य क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को नष्ट करके ही वहां की सत्ता को झुकाया जा सकता है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने हथियारों के इस्तेमाल से पहले कूटनीतिक रास्तों को आजमाने पर जोर दिया। उन्होंने नेतन्याहू को जानकारी दी कि मध्यस्थ एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ तैयार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस संभावित समझौते का उद्देश्य औपचारिक रूप से युद्ध को समाप्त करना और 30 दिनों की एक सघन बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना है। इस बातचीत के एजेंडे में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खुला रखना जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल होंगे। ट्रंप का मानना है कि ईरान के साथ एक सम्मानजनक समझौता संभव है, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो वे युद्ध के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
नेतन्याहू ट्रंप के इस कड़े और कूटनीतिक रुख से बेहद चिंतित और निराश नजर आए। इजरायली सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री को लगता है कि ईरान पर अपेक्षित हमलों में देरी करना रणनीतिक रूप से गलत है और उन्हें हमले की पूर्व निर्धारित योजना पर ही आगे बढ़ना चाहिए। सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नेतन्याहू ने अपनी इस निराशा को ट्रंप के सामने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया।
बातचीत के बाद की स्थिति को बयां करते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने यहां तक कहा कि इस कॉल के बाद नेतन्याहू काफी परेशान थे। ऐसी भी खबरें हैं कि अमेरिका में नियुक्त इजरायली राजदूत ने अमेरिकी सांसदों को नेतन्याहू की चिंताओं और ट्रंप के साथ हुए उनके मतभेदों के बारे में ब्रीफ किया है, हालांकि इजरायली दूतावास ने आधिकारिक तौर पर इस तरह के दावों का खंडन किया है। फिलहाल, ईरान के मुद्दे पर दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगियों के बीच पैदा हुई यह दरार अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य पूर्व की शांति के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप की कूटनीति जीतती है या नेतन्याहू का युद्ध का संकल्प।
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