नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। 14 साल पहले हुए निर्भया कांड की खौफनाक यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि नांगलोई इलाके में वैसी ही एक और वारदात ने पूरी दिल्ली को हिला कर रख दिया है। इस घटना ने न केवल महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि दिल्ली पुलिस के उन तमाम सुरक्षा दावों की भी पोल खोल दी है जो समय-समय पर किए जाते रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना दो-तीन दिन पुरानी बताई जा रही है। पीड़ित महिला एक फैक्ट्री में काम करती है और रोज की तरह अपना काम खत्म कर रात को घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक निजी स्लीपर बस के चालक और परिचालक ने हैवानियत की हदें पार करते हुए महिला को जबरन बस के भीतर खींच लिया। इसके बाद दरिंदगी का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया। आरोपियों ने बस को करीब सात किलोमीटर तक शहर की सड़कों पर दौड़ाया और इस दौरान चलती बस में बारी-बारी से महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने यातायात नियमों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बस की खिड़कियों के शीशों पर काली फिल्म चिपका दी थी ताकि बाहर से कुछ भी नजर न आए। इसके साथ ही बस के भीतर सभी खिड़कियों पर पर्दे भी लगाए गए थे, जिससे बस के अंदर हो रही इस हैवानियत की भनक किसी को न लग सके। करीब सात किलोमीटर के सफर के दौरान चलती बस में महिला के साथ बर्बरता की गई, लेकिन काली फिल्मों और पर्दों के कारण उसकी चीखें बाहर नहीं पहुंच पाईं।
वारदात को अंजाम देने के बाद हैवानों ने रात करीब दो बजे महिला को सड़क पर फेंक दिया और मौके से फरार हो गए। पीड़ित महिला ने किसी तरह साहस जुटाया और थाने पहुंचकर अपने साथ हुई इस दरिंदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और ताबड़तोड़ छापेमारी कर दोनों मुख्य आरोपियों को दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय चालक सुदेश और 26 वर्षीय परिचालक अमन के रूप में हुई है। इन दोनों के खिलाफ रानी बाग थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 64(1), 70(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
इस घटना ने एक बार फिर 2012 के उस काले अध्याय की याद दिला दी है जब निर्भया के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया था। 14 साल बीत जाने के बाद भी दिल्ली की सड़कों पर रात के समय महिलाओं के लिए हालात नहीं बदले हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने वर्षों में पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के क्या पुख्ता इंतजाम किए? क्या केवल दावों से ही महिलाएं सुरक्षित होंगी? नांगलोई की इस घटना ने साफ कर दिया है कि अगर सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए गए होते, तो आज दिल्ली को फिर से यह दिन नहीं देखना पड़ता। फिलहाल पुलिस यह जांच रही है कि रात के समय काली फिल्म लगी बस सड़कों पर कैसे दौड़ती रही और गश्ती दल की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी।
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