नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने देश के मीडिया संस्थानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया के एक बड़े हिस्से पर चल रहे युद्ध की गलत और भ्रामक कवरेज करने का आरोप लगाया है। ट्रंप का मानना है कि मीडिया की रिपोर्टिंग ईरान को झूठी उम्मीदें दे रही है, जिससे अमेरिकी हितों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इस तरह की कवरेज को ‘देशद्रोह’ की श्रेणी में रखा है।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक विस्तृत बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया आउटलेट्स पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन खबरों पर विशेष रूप से नाराजगी जताई जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि ईरानी सेना ने अमेरिकी सेना को युद्ध के दौरान भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ करार देते हुए कहा कि ऐसी बातें अमेरिकी जनता और सेना का मनोबल गिराने वाली हैं।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब मीडिया यह कहता है कि हमारा दुश्मन ईरान हमारे खिलाफ सैन्य रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, तो यह गद्दारी के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि ये बयान न केवल झूठे हैं बल्कि पूरी तरह से बेतुके भी हैं। उनके अनुसार, अमेरिकी मीडिया का एक हिस्सा अनजाने में या जानबूझकर दुश्मन की मदद कर रहा है और उसे मानसिक रूप से बढ़ावा दे रहा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि इसका एकमात्र परिणाम यह होता है कि ईरान को ऐसी उम्मीदें मिलने लगती हैं जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ऐसे पत्रकारों को ‘अमेरिकी कायर’ संबोधित किया जो अपने ही देश के खिलाफ खड़े नजर आते हैं।
मीडिया पर बरसने के साथ-साथ डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध में अपनी सैन्य उपलब्धियों का भी बखान किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली सेना के संयुक्त ऑपरेशन्स ने ईरान के सैन्य ढांचे को लगभग जड़ से खत्म कर दिया है। ट्रंप ने अपने दावे को मजबूती देने के लिए कहा कि ईरान की नौसेना में पहले 159 जहाज हुआ करते थे, लेकिन आज उनमें से एक-एक जहाज समुद्र की तलहटी में पहुंच चुका है। उनके अनुसार, अब ईरान के पास कोई प्रभावी नौसेना नहीं बची है।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की वायुसेना और उसकी तमाम सैन्य तकनीक अब बीते हुए कल की बात हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के प्रमुख सैन्य और राजनीतिक नेता अब इस दुनिया में नहीं रहे और वह देश अब पूरी तरह से आर्थिक तबाही के मुहाने पर खड़ा है। उन्होंने उन लोगों को ‘बेवकूफ’ और ‘एहसानफरामोश’ कहा जो ऐसी परिस्थितियों में भी अमेरिका की शक्ति पर सवाल उठाते हैं और विरोधी पक्ष की झूठी तारीफ करते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का यह गुस्सा उन रिपोर्ट्स के सार्वजनिक होने के बाद आया है जिनमें खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान का विवरण दिया गया था। कई प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ईरानी मिसाइल हमलों से अमेरिकी बेस को उस स्तर से कहीं अधिक नुकसान हुआ है, जितना सरकार द्वारा पहले स्वीकार किया गया था। इन्हीं खबरों ने ट्रंप को उकसाया, जिसके बाद उन्होंने मीडिया के खिलाफ यह कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका के भीतर ही प्रेस की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के बीच की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
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