बरनाला। पंजाब में आगामी नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और कानूनी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा की राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और प्रदेश उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में चुनाव आयोग पहुंचा था।
प्रतिनिधिमंडल में परमपाल कौर, रंजीत सिंह गिल, एन.के. वर्मा और मोहित गर्ग जैसे वरिष्ठ नेता शामिल रहे। इन नेताओं ने चुनाव आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग अपने ही द्वारा निर्धारित किए गए शेड्यूल का पालन करने में विफल रहा है। भाजपा के अनुसार, आयोग ने 30 अप्रैल 2026 को एक कार्यक्रम जारी किया था, जिसके तहत आपत्तियों के निपटारे के लिए 11 मई 2026 और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए 12 मई 2026 की तिथि तय की गई थी। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में इस समय सीमा के समाप्त होने से पहले ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
भाजपा नेताओं ने कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि वार्डबंदी और मतदाता सूची को लेकर आने वाली सभी आपत्तियों का नियमानुसार निपटारा किया जाएगा। इसके बावजूद, बिना किसी सुनवाई के अधिसूचना जारी करना न केवल अनुचित है बल्कि अदालत की अवमानना के समान है। पार्टी ने आंकड़ों की बाजीगरी पर भी सवाल उठाए हैं। भाजपा का दावा है कि कई वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वहां की कुल जनसंख्या से भी अधिक दर्ज की गई है, जो व्यावहारिक और जनसांख्यिकीय रूप से पूरी तरह असंभव है।
वार्डों के आरक्षण को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार, रोटेशन के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। जिन वार्डों में अनुसूचित जाति (एससी) की जनसंख्या अधिक है, उनकी अनदेखी की गई है और कम जनसंख्या वाले वार्डों को आरक्षित कर दिया गया है। पार्टी का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा दिखाई जा रही यह जल्दबाजी विपक्षी दलों को तैयारी का उचित अवसर न देने की एक सोची-समझी साजिश है ताकि चुनावों की निष्पक्षता को खत्म किया जा सके।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत इन अवैध अधिसूचनाओं को वापस नहीं लिया और सभी आपत्तियों का संतोषजनक निपटारा नहीं किया, तो पार्टी उच्च न्यायालय की शरण लेगी। भाजपा इस पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार है। पार्टी ने मांग की है कि वर्तमान चुनावी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और आपत्तियों के निपटारे के लिए विधिवत ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जारी किए जाएं। साथ ही, मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन करने के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए सभी दलों को उचित समय प्रदान किया जाए। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वे पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के अधिकार के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
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