UK: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव, 70 सांसदों ने खोला मोर्चा – The Hill News

UK: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव, 70 सांसदों ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली। यूनाइटेड किंगडम की राजनीति में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में लेबर पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद अब उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर विद्रोह के स्वर तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबर पार्टी के 70 से अधिक सांसदों ने कीर स्टार्मर से प्रधानमंत्री पद छोड़ने की अपील की है। पार्टी के भीतर बढ़ते इस असंतोष ने सरकार की स्थिरता और स्टार्मर के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में सोमवार को तब हड़कंप मच गया जब स्टार्मर मंत्रिमंडल के चार सहयोगियों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस सामूहिक इस्तीफे के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने निजी तौर पर यह चिंता जतानी शुरू कर दी है कि क्या स्टार्मर के नेतृत्व में पार्टी 2029 में होने वाले अगले आम चुनाव तक सुरक्षित रह पाएगी। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक, विदेश सचिव यवेट कूपर और गृह मंत्री शबाना महमूद जैसे कद्दावर कैबिनेट मंत्रियों ने भी स्टार्मर से मुलाकात की है। इन मंत्रियों ने हालिया चुनावी विफलता के बाद सत्ता के शांतिपूर्ण और सुचारू हस्तांतरण की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया है।

इतने बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध के बावजूद, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने फिलहाल झुकने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफे की मांगों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपने नेतृत्व में पार्टी और जनता का विश्वास फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष करेंगे। लंदन में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने स्वीकार किया कि उन पर संदेह करने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन उन्होंने संकल्प लिया कि वह अपने आलोचकों को गलत साबित करके दिखाएंगे।

लेबर पार्टी के लिए हालिया चुनाव परिणाम किसी झटके से कम नहीं रहे हैं। इंग्लैंड में काउंसिल चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं स्कॉटलैंड और वेल्स में भी स्थिति निराशाजनक रही है। वेल्स में पार्टी की हार अधिक चुभने वाली है क्योंकि 1999 के बाद पहली बार वेल्श संसद से लेबर पार्टी का नियंत्रण हट गया है और वहां ‘प्लेड सिम्रू’ पार्टी ने बढ़त हासिल की है। इन चुनावी हारों ने स्टार्मर की नीतियों और उनके नेतृत्व कौशल को सीधे तौर पर सवालों के घेरे में ला दिया है।

गौरतलब है कि कीर स्टार्मर जुलाई 2024 में एक ऐतिहासिक और शानदार जीत दर्ज कर सत्ता में आए थे। उन्होंने ब्रिटेन में 14 वर्षों से चले आ रहे कंजर्वेटिव शासन को जड़ से उखाड़ फेंका था। हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें आर्थिक मंदी, बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की ऊंची लागत जैसे गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई राजनीतिक विवादों ने भी उनकी छवि को नुकसान पहुँचाया है।

अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने के लिए स्टार्मर ने अब पुरानी नीतियों में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने आर्थिक विकास को गति देने, ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार करने और यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने का संकल्प लिया है। हालांकि, लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, यदि असंतुष्ट सांसदों की संख्या 81 तक पहुँच जाती है, तो नेतृत्व परिवर्तन के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वर्तमान में 70 सांसदों का विरोध इस आंकड़े के बेहद करीब है, जो स्टार्मर के लिए आने वाले दिनों में और अधिक मुश्किलें पैदा कर सकता है। अब देखना होगा कि स्टार्मर इस आंतरिक विद्रोह को शांत करने में सफल होते हैं या ब्रिटेन को एक बार फिर नया प्रधानमंत्री देखने को मिलेगा।

 

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