पौड़ी, 08 मई 2026। उत्तराखंड के पौड़ी जनपद अंतर्गत विकासखंड पौड़ी के बमठी गांव में पिछले कई दिनों से दहशत का पर्याय बना आदमखोर गुलदार आखिरकार मारा गया है। वन विभाग की विशेष टीम ने गुरुवार रात लगभग नौ बजे इस गुलदार को उस समय ढेर कर दिया जब वह घटनास्थल के पास ही देखा गया। विभाग के अनुसार, गुलदार को मारना एक अंतिम विकल्प था, क्योंकि उसे पकड़ने और बेहोश करने के तमाम प्रयास विफल साबित हो रहे थे। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
घटनाक्रम के अनुसार, बमठी गांव में गुलदार का आतंक 23 अप्रैल को शुरू हुआ था, जब 70 वर्षीय सीता देवी अपने घर के पास के खेत में घास काट रही थीं। उसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। साहसी महिला ने अपनी जान बचाने के लिए दराती से गुलदार पर वार भी किए और शोर मचाया, लेकिन जंगली जानवर की ताकत के आगे उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। जब तक ग्रामीण शोर सुनकर मौके पर पहुंचे, गुलदार महिला को घसीटकर पास की झाड़ियों में ले जा चुका था, जहां उनकी मौत हो गई थी।
ग्रामीणों ने उस समय दावा किया था कि हमला करने वाला अकेला नहीं था, बल्कि वहां दो गुलदार मौजूद थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल व्याप्त हो गया और लोगों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। जनभावनाओं और खतरे को देखते हुए वन विभाग ने तुरंत सक्रियता दिखाई। विभाग ने मशहूर शिकारी जाय हुकिल के नेतृत्व में विभागीय शूटरों और लगभग 20 कर्मचारियों की एक बड़ी टीम तैनात की। गुलदार को पकड़ने के लिए क्षेत्र में चार पिंजरे लगाए गए और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चार सोलर सीसीटीवी, 10 कैमरा ट्रैप और ड्रोन की मदद ली गई।
जांच और निगरानी के दौरान 4 मई को वन विभाग को पहली सफलता मिली, जब घटनास्थल के पास ही एक मादा गुलदार पिंजरे में कैद हो गई। हालांकि, ग्रामीणों की आशंका सच साबित हुई और इलाके में एक अन्य नर गुलदार की सक्रियता बनी रही। गढ़वाल मंडल की एसडीओ आयशा बिष्ट ने जानकारी दी कि पिछले चार दिनों से एक गुलदार लगातार उसी क्षेत्र में घूमता हुआ देखा जा रहा था। विभाग ने पहले उसे पिंजरे में कैद करने की कोशिश की और फिर उसे ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने का प्रयास किया, लेकिन वह हर बार बच निकला।
गुरुवार रात जब गुलदार फिर से इंसानी बस्ती के करीब पहुंचा, तो सुरक्षा कारणों से उसे अंतिम विकल्प के रूप में शूट करने का निर्णय लिया गया। विभाग द्वारा की गई फायरिंग में गुलदार मारा गया। शुक्रवार को पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत गुलदार का पोस्टमार्टम किया। जांच में पता चला कि मारा गया गुलदार लगभग 8 वर्ष का नर था और उसके एक पैर में चोट के निशान भी थे, जो अक्सर जंगली जानवरों के आदमखोर बनने का एक बड़ा कारण होता है। पोस्टमार्टम के बाद एनटीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के मानकों का पालन करते हुए गुलदार के शव को नष्ट कर दिया गया।
एसडीओ आयशा बिष्ट ने बताया कि यद्यपि आदमखोर गुलदार मारा जा चुका है, लेकिन विभाग अभी भी पूरी तरह सतर्क है। एहतियात के तौर पर वन विभाग की टीम कुछ और दिनों तक बमठी गांव और आसपास के क्षेत्रों में गश्त जारी रखेगी ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल, इस खूंखार जानवर के मारे जाने से ग्रामीणों ने चैन की नींद ली है और क्षेत्र में सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटने की उम्मीद है।