नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए एक नया प्रस्ताव
भेजा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक
बातचीत ठप पड़ी हुई है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वर्तमान अस्थायी
युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना है। ईरान के सरकारी मीडिया के
अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का उपयोग करते हुए अपना संदेश
वाशिंगटन तक पहुँचाया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने पिछले महीने हुई
सीधी वार्ता के पहले दौर में भी दोनों देशों के बीच सेतु का कार्य किया था।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस नए ईरानी प्रस्ताव पर असंतोष
व्यक्त किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह ईरान द्वारा रखी गई शर्तों
से संतुष्ट नहीं हैं और तेहरान के खिलाफ लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। जैसे
ही ईरान के इस नए शांति प्रस्ताव की जानकारी सार्वजनिक हुई, अंतरराष्ट्रीय बाजार
में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अप्रैल में हुए संघर्ष विराम के बाद से युद्ध जैसी
स्थिति समाप्त हो गई है। इस तर्क के जरिए व्हाइट हाउस को युद्ध संबंधी
फैसलों के लिए कांग्रेस से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दूसरी
ओर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर लगी
पाबंदियों को फिलहाल हटाने के पक्ष में नहीं है। ईरान की समाचार एजेंसी इरना
के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मसौदा गुरुवार शाम पाकिस्तान को सौंप दिया गया था,
हालांकि इसमें परमाणु गतिविधियों या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या विशिष्ट
बातें कही गई हैं, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि नौसैनिक नाकाबंदी से ईरान की तेल से होने वाली आय
रुक जाएगी, जिससे वह मजबूर होकर बातचीत की मेज पर वापस आएगा। इसके जवाब में ईरान
की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा कि
ईरान की विशाल सीमाओं की घेराबंदी करना नामुमकिन है। ईरानी अधिकारियों ने
चेतावनी दी है कि यदि यह घेराबंदी नहीं हटाई गई और होर्मुज का रास्ता नहीं
खुला, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।
इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने देश की जनता से
‘आर्थिक जिहाद’ का आह्वान किया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि ईरान
ने सैन्य मोर्चे पर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी है, लेकिन अब आर्थिक और
सांस्कृतिक स्तर पर दुश्मनों को हराने की जरूरत है। उन्होंने
स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर दिया और उद्योगपतियों से कर्मचारियों
की छंटनी न करने की अपील की। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बातचीत में आए
गतिरोध को देखते हुए रणनीतिक हमलों की एक नई योजना भी तैयार की है, जिसकी
जानकारी राष्ट्रपति ट्रंप को दी गई है।
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