देहरादून, 14 अप्रैल। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लिए प्रगति, प्रकृति और संस्कृति के संतुलन को जरूरी बताया। गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में 210 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया। इससे पहले उन्होंने डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में भाग लिया।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने बैसाखी और बिहू की शुभकामनाओं से की। साथ ही आने वाली चारधाम यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कॉरिडोर से तीर्थयात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और नई परियोजनाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर को याद करते हुए सामाजिक न्याय और संतुलित विकास पर जोर दिया। उत्तराखंड द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने को उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो संविधान की भावना के अनुरूप है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक दौर में सड़क, रेल और अन्य बुनियादी ढांचे देश की प्रगति की आधार रेखा बनते जा रहे हैं। बीते वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंच रहा है। उत्तराखंड में भी बड़े पैमाने पर परियोजनाएं चल रही हैं, जिनसे गांवों तक कनेक्टिविटी मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि देश में तेजी और बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। इस कॉरिडोर से समय की बचत के साथ परिवहन लागत भी कम होगी और किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी।
पर्यटन के क्षेत्र में भी बदलाव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य अब पूरे वर्ष पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में हुए प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भविष्य में उनके लिए अधिक अवसर सुनिश्चित होने की बात कही। कार्यक्रम में राज्य के विकास, सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया गया।
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