नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में लगाई गई पाबंदियों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान की नाकाबंदी के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब ओमान की प्रादेशिक समुद्री सीमा के भीतर से एक नया और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग खोज लिया गया है। इस नए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का उपयोग करते हुए भारतीय मालवाहक जहाज सहित चार विशालकाय पोत सफलतापूर्वक अपनी मंजिल की ओर बढ़े हैं।
हालिया सैटेलाइट इमेज और एआईएस (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) डेटा के गहन विश्लेषण से यह पुख्ता हुआ है कि ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र का उपयोग करने वाला यह मार्ग शिपिंग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों में मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले ‘हब्रुट’ और ‘धलकुट’ शामिल हैं, जो क्रमशः सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहे थे। इसके अलावा, पनामा के ध्वज वाला ‘सोहार’ एलएनजी वाहक भी इसी सुरक्षित मार्ग से गुजरता हुआ देखा गया।
विशेष रूप से, इस बेड़े के पीछे एक भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज भी था, जिसकी पहचान ‘एमएसवी कुबा एमएनवी 2183’ के रूप में हुई है। एआईएस सिग्नल्स के अनुसार, यह भारतीय पोत 31 मार्च को दुबई से रवाना हुआ था और इसकी नवीनतम स्थिति ओमान के दिब्बा बंदरगाह से करीब 40 किलोमीटर दूर खुले समुद्र में दर्ज की गई। इन जहाजों को मस्कट के तट से लगभग 350 किलोमीटर की दूरी पर देखा गया, जो अमीराती शहर रास अल खैमाह के पास ओमान के जलक्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे।
ईरान की होर्मुज में नाकाबंदी के चलते वैश्विक शिपिंग उद्योग भारी दबाव में था, जिससे ईंधन की कीमतों में उछाल की आशंका बनी हुई थी। ओमान का यह नया रूट न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय ऑयल सप्लाई चेन पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को भी कम करने में मददगार साबित होगा। समुद्री विश्लेषण फर्म टैंकरट्रैकर्स के आंकड़ों ने इस नए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की पुष्टि की है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक व्यापार अब वैकल्पिक और सुरक्षित रास्तों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इस मार्ग का उपयोग नियमित रूप से किया जा सकेगा या नहीं। लेकिन मौजूदा संकट के समय में इस सुरक्षित रास्ते का मिलना वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह मार्ग वैश्विक शिपिंग दबाव को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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