चंडीगढ़। पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में दी जा रही किसी भी प्रकार की सब्सिडी को वापस नहीं लिया जाएगा और सभी जनहितैषी योजनाएं निरंतर जारी रहेंगी। चंडीगढ़ स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी समाज के सभी वर्गों को समान स्तर पर लाने की है, जिसे पूरी निष्ठा से निभाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार अपनी सब्सिडी की जरूरतों को पूरा करने के लिए राजस्व बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है, जिसका परिणाम है कि मार्च महीने में जीएसटी संग्रह में 12.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
विपक्षी दलों द्वारा पंजाब की आर्थिक स्थिति पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने पूर्व वित्तमंत्रियों को खुली चुनौती दी कि वे राज्य की वित्तीय हालत पर उनके साथ कभी भी सार्वजनिक बहस कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान खजाना कभी खाली नहीं हुआ और वित्तीय सुधारों के मामले में पंजाब ने देश में कई नई मिसालें कायम की हैं। इन्हीं सुधारों के कारण पंजाब को हाल ही में संपन्न हुए वित्त वर्ष में केंद्र से 400 करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट भी मिली है।
महिलाओं के कल्याण के लिए शुरू की जा रही ‘मां-बेटी सत्कार योजना’ के बारे में जानकारी देते हुए वित्तमंत्री ने बताया कि इसका पंजीकरण 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इस योजना के तहत सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। हालांकि, आयकर दाताओं, सरकारी कर्मचारियों, सांसदों और विधायकों की पत्नियों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। वहीं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मिड-डे मील वर्कर और निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं इस आर्थिक सहायता की पात्र होंगी।
सरकारी कर्मचारियों के बकाया और डीए के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय का लंबित 14,191 करोड़ रुपये का भुगतान वर्तमान सरकार द्वारा किया जा चुका है। सरकार अब कर्मचारियों को डीए की अगली किस्त देने और पुरानी पेंशन योजना को लागू करने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य पर बढ़ते कर्ज के आरोपों पर उन्होंने केंद्र सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 के मुकाबले देश पर कर्ज का बोझ कई गुना बढ़ा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड को 2,980 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,738 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है, जो राज्य की मजबूत होती वित्तीय स्थिति का प्रमाण है। वित्तमंत्री ने आश्वस्त किया कि विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।