नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में जारी सैन्य संघर्ष की तपिश अब वाशिंगटन के गलियारों में भी महसूस की जा रही है। अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर आंतरिक राजनीति काफी गरमा गई है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सांसदों ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सांसदों ने ट्रंप की रणनीति पर कड़े सवाल उठाते हुए इसे दिशाहीन बताया है और तुरंत युद्धविराम की पुरजोर मांग की है।
अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर ट्रंप प्रशासन की जमकर खिंचाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस युद्ध का कोई सकारात्मक या स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है। नेताओं का तर्क है कि डोनल्ड ट्रंप ने बिना किसी ठोस और दूरगामी योजना के यह सैन्य अभियान शुरू किया, जिसके कारण अमेरिका अब तक अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहा है।
विपक्ष का कहना है कि जिस मकसद से यह युद्ध छेड़ा गया था, उसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। सांसदों के अनुसार, न तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कोई बड़ा नुकसान पहुँचा है और न ही उसकी मिसाइल शक्ति और क्षेत्रीय आतंकी संगठनों को समर्थन देने की नीति में कोई नरमी आई है। सांसदों ने रेखांकित किया कि इस संघर्ष के कारण ईरान के आम नागरिकों का जीवन और अधिक नारकीय हो गया है, जबकि अमेरिकी प्रशासन कोई वास्तविक रणनीतिक बढ़त हासिल करने में नाकाम रहा है।
युद्ध की भयावहता और इसकी भारी कीमत का उल्लेख करते हुए डेमोक्रेट सांसदों ने बताया कि अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की इस जंग में जान जा चुकी है और सैकड़ों जवान घायल हुए हैं। इसके अलावा, युद्ध के मैदान में अमेरिका के अरबों डॉलर के अत्याधुनिक हथियार और सैन्य साजो-सामान स्वाहा हो गए हैं। मानवीय क्षति के आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि हजारों ईरानी नागरिक भी इस बमबारी का शिकार हुए हैं, जिनमें 150 से अधिक निर्दोष स्कूली छात्राएं शामिल हैं।
विपक्ष ने ट्रंप की नीतियों के आर्थिक और राजनयिक प्रभावों पर भी चिंता जताई है। बयान के अनुसार, युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल, उर्वरक और हीलियम जैसी अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई और तनाव बढ़ रहा है। डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया कि ट्रंप के अड़ियल रवैये के कारण अमेरिका के कई पुराने और विश्वसनीय मित्र देश भी अब उससे दूरी बना रहे हैं और इस युद्ध में सहयोग देने से कतरा रहे हैं।
अंत में, विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खोलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सैन्य बल के प्रयोग से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि कूटनीतिक प्रयास ही इस विनाशकारी संघर्ष को रोकने का एकमात्र विकल्प हैं। डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही युद्धविराम की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो यह संघर्ष एक लंबे और आत्मघाती दौर में बदल सकता है।
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