सोलन। हिमाचल प्रदेश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ एंट्री टैक्स की दरों में की गई बढ़ोतरी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तनाव पैदा कर दिया है। पंजाब और हरियाणा से सटे प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर लोगों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण हिमाचल आने और यहां से बाहर जाने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे हजारों यात्री और पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए हैं।
बद्दी में इस विरोध प्रदर्शन को उस समय और अधिक बल मिला जब पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी स्वयं समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा टैक्स दरों में की गई वृद्धि को अनुचित बताते हुए इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दिया है। सोलन जिले की सीमाओं पर स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। बरोटीवाला, बद्दी, बघेरी, ढेरोवाल और दभोटा जैसे प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। इसके चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों से आने वाली गाड़ियां और बसें घंटों से लंबे जाम में फंसी हुई हैं।
इस चक्का जाम का असर केवल आम जनता और पर्यटकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ कहे जाने वाले उद्योगों को भी संकट में डाल दिया है। हिमाचल का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-नालागढ़ इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति और निर्यात पहले से ही प्रभावित था, वहीं अब सीमा पर वाहनों के फंसने से उत्पादन प्रक्रिया पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। औद्योगिक संगठनों का मानना है कि यदि यातायात जल्द सुचारू नहीं हुआ तो उद्योगों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
वहीं दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर आबकारी विभाग ने अपनी सफाई पेश की है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टोल की संशोधित दरें अभी तक तकनीकी रूप से सिस्टम में अपडेट नहीं की गई हैं। सॉफ्टवेयर अपडेट न होने के कारण स्क्रीन पर अधिक शुल्क प्रदर्शित हो रहा है, जिससे वाहन चालकों के बीच भ्रम और गुस्से की स्थिति पैदा हुई है। विभाग का दावा है कि फिलहाल सरकार के पुराने निर्देशों के तहत ही बहुत मामूली संशोधन के साथ वसूली की जा रही है।
सीमाओं पर बढ़ते तनाव के कारण हिमाचल में प्रवेश और निकास दोनों ही अत्यंत मुश्किल हो गए हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्य के बाहर से आए सैलानी भी इस अव्यवस्था के कारण परेशान हैं। प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि टैक्स बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो इसके दूरगामी परिणाम प्रदेश के पर्यटन और व्यापार पर देखने को मिल सकते हैं।