नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई। देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना के बेड़े में तीन नए और अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल किए गए हैं। इनमें उन्नत गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘दुनागिरी’, सर्वेक्षण पोत ‘संशोधक’ और पनडुब्बी रोधी युद्धक जलयान ‘अग्रय’ का नाम प्रमुख है। इन तीनों शक्तिशाली जहाजों का निर्माण स्वदेशी तकनीक के माध्यम से ‘गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड’ (जीआरएसई) द्वारा किया गया है, जो भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक बड़ा प्रमाण है।
एडवांस्ड गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘दुनागिरी’ नौसेना के सबसे आधुनिक और परिष्कृत प्लेटफार्मों में से एक माना जा रहा है। 149 मीटर की लंबाई और 6,670 टन वजन वाला यह फ्रिगेट दुनिया के बेहतरीन हथियारों और सेंसरों से लैस है। इसमें एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली लगाई गई है, जो युद्ध के समय सटीक निर्णय लेने में सक्षम है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ‘दुनागिरी’ ब्रह्मोस जैसी शक्तिशाली एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों से सुसज्जित है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की हमलावर और रक्षात्मक क्षमताएं कई गुना बढ़ गई हैं, जिससे वह किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
नौसेना के बेड़े में शामिल दूसरा महत्वपूर्ण जहाज ‘संशोधक’ है, जो एक उन्नत सर्वेक्षण पोत (सर्वे वेसल) है। लगभग 110 मीटर लंबा और 3,400 टन विस्थापन क्षमता वाला यह जहाज अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। इसका मुख्य कार्य समुद्री सतह के नीचे की खोज करना और सटीक डेटा एकत्र करना है, जो भविष्य के नौसैनिक अभियानों और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है। आधुनिक सेंसरों की मदद से यह पोत गहरे समुद्र में सर्वेक्षण कार्य को सुगमता से संपन्न करेगा।
तीसरा जलयान ‘अग्रय’ है, जो अर्नाला श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जल पोतों (ASW SWC) की श्रृंखला का चौथा जहाज है। यह पुराने आईएनएस अग्रय का आधुनिक अवतार है, जिसे साल 2017 में नौसेना से सेवामुक्त कर दिया गया था। नया ‘अग्रय’ सतह के नीचे की निगरानी, पनडुब्बियों की खोज और उन पर सटीक हमले करने में माहिर है। यह हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है, जो इसे दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए घातक बनाता है। यह विमानों के साथ मिलकर समन्वित युद्ध अभियानों को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है। इन तीनों स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का दबदबा और अधिक बढ़ेगा और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक चाक-चौबंद होगी।