गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गृह जनपद गोरखपुर में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और उत्तर प्रदेश के विकास की तुलना बुलेट ट्रेन की रफ्तार से की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जिस गति से आगे बढ़ रही है, उसका मुकाबला करना विपक्ष के बस की बात नहीं है।
अयोध्या का विशेष उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय था जब अयोध्या जाने वाले श्रद्धालुओं को पुलिस की लाठियों और गोलियों का सामना करना पड़ता था। उस समय की सरकारें न केवल श्रद्धालुओं को प्रताड़ित करती थीं, बल्कि वहां दुर्व्यवस्था का बोलबाला था। आज वही अयोध्या दुनिया की सुंदरतम नगरी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां भगवान श्रीराम का भव्य और दिव्य मंदिर निर्मित हो चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि मां विंध्यवासिनी मंदिर का भी उनकी सरकार ने भव्य सुंदरीकरण कराया है।
विपक्षी दलों की तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रहार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश के 1500 से अधिक मंदिरों के सुंदरीकरण के लिए धनराशि जारी की है, जिससे राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को एक नई दिशा और गति मिली है। उन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों से इसकी तुलना करते हुए कहा कि पहले मंदिरों के विकास के लिए कोई सुविधा या बजट आवंटित नहीं किया जाता था, बल्कि सरकारी खजाने का पैसा कब्रिस्तानों के निर्माण और रखरखाव पर खर्च किया जाता था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें मंदिर प्यारे हैं, इसलिए हम मंदिरों के लिए काम कर रहे हैं और जिसे जो प्रिय होता है, वह उसी दिशा में कार्य करता है।
कार्यकर्ताओं में नया जोश भरते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में डबल इंजन की सरकार बुलेट ट्रेन की स्पीड से विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न पर तंज कसते हुए कहा कि यह पंक्चर साइकिल कभी भी विकास की इस गति का मुकाबला नहीं कर पाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जब सरकार डबल स्पीड से काम करेगी, तो यह पंक्चर साइकिल पूरी तरह से धराशायी हो जाएगी। मुख्यमंत्री के इस आक्रामक अंदाज ने कार्यकर्ताओं में आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए उत्साह भर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी सरकार की प्राथमिकता आध्यात्मिक विरासत को संजोने के साथ-साथ विकास की रफ्तार को बनाए रखना है।