Uttarpradesh: बहराइच के विस्थापित गांव भरथापुर को मिला नया जीवन मुख्यमंत्री ने बस्ती का नाम रखा भरतपुर

बहराइच। भारत के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्र में बसे आखिरी गांव भरथापुर के निवासियों के लिए बुधवार का दिन एक नई शुरुआत लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांव के विस्थापन के लिए तैयार की जा रही नई कालोनी का नाम आधिकारिक रूप से ‘भरतपुर’ रखने की घोषणा की। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 136 प्रभावित परिवारों को आवास और भूमि आवंटन पत्र के चेक वितरित किए। उन्होंने मंच पर स्वयं 10 महिलाओं को भूमि आवंटन के दस्तावेज सौंपकर इस पुनर्वास प्रक्रिया को गति दी। सरकार ने इस नए गांव को आधुनिक सुविधाओं के साथ बसाने के लिए 21 करोड़ 55 लाख 55 हजार 951 रुपये की बड़ी धनराशि मंजूर की है।

संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने अक्टूबर 2025 की उस हृदयविदारक घटना को याद किया, जिसने भरथापुर के विस्थापन की नींव रखी। उन्होंने बताया कि जब गांव के लोग बाजार से जरूरी सामान लेकर नाव से लौट रहे थे, तब सरयू नदी की तेज लहरों में नाव समा गई थी, जिसमें नौ लोगों की जान चली गई थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन से बातचीत में जब उन्हें पता चला कि वह पूरा इलाका घड़ियालों और मगरमच्छों से भरा हुआ है, तो वे ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर अत्यंत चिंतित हो उठे। उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर ग्रामीणों की तकलीफों को देखा और महसूस किया। इसी के बाद प्रशासन को निर्देश दिए गए कि इन परिवारों को तहसील के सेमरहना क्षेत्र में सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जाए।

कालोनी के नामकरण के पीछे की सोच को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्र का समय मर्यादा पुरुषोत्तम राम और उनके भाई भरत के अटूट प्रेम के मिलन का प्रतीक है। चूंकि भरथापुर के लोग अब सेमरहना में आकर बस रहे हैं, इसलिए दोनों क्षेत्रों के निवासियों के बीच भाइयों जैसा प्रेम और सामंजस्य बना रहे, इसी उद्देश्य से इस नई बस्ती का नाम ‘भरतपुर’ रखा गया है।

पुनर्वास की इस पहल पर ग्रामीणों ने गहरी संतुष्टि और खुशी जाहिर की है। विस्थापित होने वाले ग्रामीण मुन्नालाल मौर्य ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उनका पुराना गांव तीन तरफ से नदियों से घिरा था, जहां बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं था। बच्चों को स्कूल भेजने या शौचालय जैसी जरूरतों के लिए भी उन्हें 60 किलोमीटर का लंबा सफर नाव के जरिए तय करना पड़ता था। नदी की कटान के कारण उनकी खेती योग्य भूमि भी जलमग्न हो चुकी थी और रोजगार के अवसर समाप्त हो गए थे। मुन्नालाल ने कहा कि नाव हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए संज्ञान और इस नई बसावट के प्रबंध के लिए पूरा गांव उनका आभारी है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि भरतपुर में उन्हें एक सुरक्षित माहौल और बेहतर भविष्य मिल सकेगा।

 

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