नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध की आग अब खतरनाक रूप से फैलती जा रही है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी टकराव ने अब खाड़ी देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सोमवार को ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रणनीतिक ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों पर बड़े हमले किए गए। इन हमलों में न केवल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, बल्कि एक नागरिक की जान जाने की भी पुष्टि हुई है। ईरान द्वारा किए गए इस ताजा हमले ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।
दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला और आगजनी
सोमवार तड़के ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, दुबई एयरपोर्ट के नजदीकी इलाके को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ड्रोन अटैक के कारण हवाई अड्डे के पास स्थित फ्यूल टैंकों (ईंधन टैंक) में भीषण आग लग गई। सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए दुबई एयरपोर्ट प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सभी उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया।
इस अचानक हुई नाकेबंदी और हवाई हमले का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा। कोच्चि (भारत) से दुबई के लिए रवाना हुई एक फ्लाइट को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा क्योंकि दुबई एयरपोर्ट ने लैंडिंग के लिए रनवे को असुरक्षित घोषित कर दिया था। दुबई में हुए इस हमले ने वैश्विक व्यापार और पर्यटन के इस केंद्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
अबू धाबी में मिसाइल हमला और नागरिक की मौत
दुबई के बाद ईरान ने यूएई की राजधानी अबू धाबी को भी अपना निशाना बनाया। अबू धाबी के अल बह्याह इलाके में एक भीषण मिसाइल हमला हुआ। यह मिसाइल सीधे तौर पर एक नागरिक वाहन पर जाकर गिरी, जो सड़क से गुजर रहा था। इस दुखद घटना में वाहन के भीतर मौजूद एक फलस्तीनी नागरिक की मौके पर ही मौत हो गई।
अबू धाबी के मीडिया कार्यालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, “अल बह्याह क्षेत्र में एक नागरिक वाहन पर मिसाइल गिरने के कारण एक फलस्तीनी नागरिक की मृत्यु हो गई है।” प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है और सख्त हिदायत दी है कि लोग केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अराजकता न फैले।
ईरान की रणनीति और बढ़ता क्षेत्रीय संकट
ईरान द्वारा यूएई पर किए गए ये हमले इस बात का संकेत हैं कि वह अब इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को भी सीधे तौर पर दंडित करने की नीति पर चल रहा है। ईरान ने पहले भी चेतावनी दी थी कि जो देश अमेरिकी और इजरायली सेना को अपने यहां आधार प्रदान करेंगे, उन्हें भी युद्ध का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों पर हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमले इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इसी तरह नागरिक क्षेत्रों और हवाई अड्डों को निशाना बनाना जारी रखता है, तो इससे न केवल मानवीय संकट पैदा होगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी खतरे में पड़ गए हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के इन हमलों का क्या जवाब दिया जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल, यूएई में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और क्षतिग्रस्त इलाकों में राहत कार्य जारी है।
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