Himachal: हिमाचल के विकास को रफ्तार देने के लिए विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र से मांगा विशेष सहयोग

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदेश के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में उन्होंने नई दिल्ली स्थित संसद भवन में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के साथ एक औपचारिक बैठक की। इस उच्च स्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास की प्राथमिकताओं को रेखांकित करना और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से संबंधित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार का विशेष सहयोग प्राप्त करना था। बैठक के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए केंद्र से अधिक उदार वित्तीय सहायता की मांग की।

पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष वित्तीय मानकों की मांग

बैठक के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट चुनौतियों को विस्तार से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल जैसे राज्य में विकास कार्य करना मैदानी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक जटिल और खर्चीला है। कठिन पर्वतीय भू-संरचना, संवेदनशील और नाजुक पर्यावरणीय संतुलन तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में बिखरी हुई बसाहटों के कारण सड़कों, जलापूर्ति योजनाओं, सीवरेज सिस्टम और अन्य नागरिक सुविधाओं के निर्माण में अत्यधिक लागत आती है।

उन्होंने मनोहर लाल से अनुरोध किया कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत हिमाचल प्रदेश को एक ‘विशेष श्रेणी’ के पहाड़ी राज्य के रूप में देखा जाना चाहिए। विक्रमादित्य सिंह का तर्क था कि चूंकि यहां रखरखाव की लागत भी अधिक होती है, इसलिए केंद्र सरकार को अपने वर्तमान वित्तीय मानकों में उचित लचीलापन लाना चाहिए ताकि राज्य में चल रही विकास परियोजनाएं धन के अभाव में न रुकें।

अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन पर जोर

शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के विजन पर चर्चा करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने ‘अमृत 2.0’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)’ के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्रीय आवंटन बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य हर नगर में घर-घर तक नल का कनेक्शन पहुंचाना, आधुनिक सीवरेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित करना और कचरा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास के साथ-साथ राज्य की पवित्र नदियों और हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है, जिसके लिए केंद्र से अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है।

डिजिटल शासन और ‘वन स्टेट वन पोर्टल’

डिजिटल इंडिया के विजन को हिमाचल में धरातल पर उतारने के प्रयासों की जानकारी देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने ‘राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन’ के कार्यान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने मनोहर लाल को बताया कि हिमाचल प्रदेश इस समय ‘वन स्टेट, वन पोर्टल’ की महत्वाकांक्षी अवधारणा पर काम कर रहा है। इस डिजिटल मंच के माध्यम से भवन निर्माण अनुमति, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) और व्यापार लाइसेंस जैसी आवश्यक नागरिक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को राज्य के दूरदराज के छोटे पहाड़ी कस्बों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। विक्रमादित्य सिंह इसे जीआईएस आधारित योजना और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से जोड़ना चाहते हैं ताकि प्रशासन में पारदर्शिता और गति आए।

जनसंख्या मानकों में लचीलेपन की आवश्यकता

एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल के कई छोटे पहाड़ी नगरों की स्थायी आबादी भले ही कम हो, लेकिन वहां पर्यटकों का आवागमन बहुत अधिक रहता है। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर फंड का आवंटन करना राज्य के साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि पर्यटन के दबाव और व्यापक भौगोलिक सेवा क्षेत्र को देखते हुए जनसंख्या-आधारित मानदंडों में विशेष रियायत दी जानी चाहिए। उन्होंने कुछ विशिष्ट लोक निर्माण परियोजनाओं के लिए भी केंद्रीय सहायता मांगी जो शहरी क्षेत्रों में यातायात के दबाव को कम करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

जठिया देवी और हिम-चंडीगढ़ परियोजनाएं

बैठक के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने राज्य की दो सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं, ‘जठिया देवी टाउनशिप’ और ‘हिम-चंडीगढ़ प्रोजेक्ट’ के लिए विशेष केंद्रीय सहायता का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि ये परियोजनाएं न केवल शहरी कनेक्टिविटी को बेहतर करेंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेंगी। जठिया देवी जैसी परियोजनाओं के समयबद्ध अनुमोदन से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन क्षेत्र को भी एक नया आयाम मिलेगा।

केंद्र का आश्वासन और भविष्य की रणनीति

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने विक्रमादित्य सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दों को अत्यंत गंभीरता और सहानुभूति के साथ सुना। उन्होंने स्वीकार किया कि पहाड़ी राज्यों की चुनौतियां वास्तव में भिन्न होती हैं। मनोहर लाल ने आश्वासन दिया कि भारत सरकार की नीतिगत रूपरेखा के भीतर रहते हुए हिमाचल प्रदेश की इन सभी जायज मांगों और आवश्यकताओं पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में चल रहे डिजिटल मिशन के प्रयासों की भी सराहना की।

बैठक के उपरांत विक्रमादित्य सिंह ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के हर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी केंद्र के समक्ष हिमाचल के हितों की पुरजोर वकालत करते रहेंगे ताकि राज्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को ‘मिशन मोड’ में पूरा किया जा सके। इस बैठक को हिमाचल के शहरी और ग्रामीण विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

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