Uttarakhand: उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना अब होगी आसान और प्रदूषण बोर्ड ने बढ़ाया क्षेत्रीय कार्यालयों का अधिकार – The Hill News

Uttarakhand: उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना अब होगी आसान और प्रदूषण बोर्ड ने बढ़ाया क्षेत्रीय कार्यालयों का अधिकार

देहरादून। उत्तराखंड में नए उद्योगों की स्थापना और उनके संचालन की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सरल और तेज होने जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने औद्योगिक इकाइयों के स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन के लिए एक नया मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। अब नारंगी (ऑरेंज) और हरी (ग्रीन) श्रेणी के उद्योगों का स्थलीय सत्यापन थर्ड पार्टी यानी तीसरे पक्ष के माध्यम से कराया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पीसीबी की बोर्ड बैठक में आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने में होने वाले विलंब को कम करना और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करना है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, किसी भी औद्योगिक इकाई को लगाने से पहले और फिर उसका संचालन शुरू करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। चूंकि उत्तराखंड में पीसीबी के केवल चार क्षेत्रीय कार्यालय हैं और विभाग में कर्मचारियों की भी भारी कमी है, इसलिए निरीक्षण के काम में अक्सर लंबा समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए बोर्ड ने प्रतिष्ठित शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है।

अब आईआईटी कानपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर, आईआईटी रुड़की और आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। इन संबंधित संस्थाओं के विशेषज्ञ इकाइयों का निरीक्षण करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेंगे। इसके आधार पर पीसीबी के माध्यम से एनओसी जारी की जाएगी। नारंगी श्रेणी में दवा निर्माण इकाइयां और होटल-रेस्तरां जैसे उद्योग शामिल हैं, जबकि हरी श्रेणी में हल्की इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान की असेंबली जैसे कम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग आते हैं।

इसके साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों (आरओ) की शक्तियों का भी विस्तार किया है। अब क्षेत्रीय कार्यालय 10 करोड़ रुपये तक की लागत वाली औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन की अनुमति स्वयं दे सकेंगे। इससे पहले, क्षेत्रीय कार्यालयों के पास केवल 5 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने का अधिकार था और इससे अधिक लागत वाले उद्योगों की फाइलें पीसीबी मुख्यालय भेजनी पड़ती थीं। अब क्षेत्रीय स्तर पर ही बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने से निवेश प्रक्रिया को गति मिलेगी और उद्यमियों को राजधानी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

हालांकि, बोर्ड ने कुछ संवेदनशील और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर मुख्यालय का नियंत्रण बरकरार रखा है। स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, इंडक्शन फर्नेस और रेलिंग से जुड़े उद्योगों के लिए अनुमति अब भी पीसीबी मुख्यालय के माध्यम से ही दी जाएगी। प्रमुख सचिव और पीसीबी अध्यक्ष आरके सुधांशु ने बताया कि थर्ड पार्टी निरीक्षण की इस व्यवस्था से विभाग की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। सरकार का यह कदम प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने और औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

 

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