अहमदाबाद। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुजरात में आयोजित सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड की विभिन्न नवाचारी योजनाओं की गूँज सुनाई दी। इस मंथन कार्यक्रम में ‘मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना’, ‘मिलेट्स मिशन’ और ‘दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना’ की जमकर सराहना की गई। केंद्र सरकार अब इन योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण आजीविका को देश भर में मजबूती मिल सके।
सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने बैठक के दौरान उत्तराखंड सरकार द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के साथ राज्य में लागू की गई इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना है। धन सिंह रावत के अनुसार, दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत अब तक 11 लाख 71 हजार से अधिक किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को 7,284 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
बैठक में विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना’ की सफलता को रेखांकित किया गया। यह योजना पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं के श्रमभार को कम करने और पशुपालकों को उचित दर पर साइलेज उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित हुई है। अब तक 28,605 लाभार्थियों ने इसका लाभ उठाया है। इसी तरह, मिलेट्स मिशन के माध्यम से राज्य के 11 हजार से अधिक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की गई है, जिससे राज्य की पारंपरिक कृषि और पोषण सुरक्षा को नया आयाम मिला है।
अमित शाह ने उत्तराखंड के इन प्रयासों को सराहा और कहा कि किसानों की खुशहाली के लिए इन मॉडलों को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान धन सिंह रावत ने प्रदेश के सीमावर्ती और दुर्गम जिलों की बैंकिंग समस्याओं को भी मंच पर रखा। उन्होंने रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और चम्पावत में जिला सहकारी बैंकों के संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस प्रदान करने की पुरजोर मांग की।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित देश भर के राज्यों के सहकारिता मंत्री उपस्थित रहे। उत्तराखंड की इन उपलब्धियों ने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की एक प्रगतिशील छवि पेश की है। सरकार का मानना है कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना ही आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सबसे मजबूत कदम है।
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