शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ा ऐलान करते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राज्य में हो रहे बेनामी जमीन सौदों की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन की धोखाधड़ी और बेनामी संपत्तियों के अवैध कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, विशेष रूप से गगरेट क्षेत्र से जुड़े संदिग्ध गिरोहों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह मामला उस समय गरमाया जब गगरेट के विधायक राकेश कालिया ने गगल हवाई अड्डे के भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित एक प्रश्न पूछा। चर्चा के दौरान राकेश कालिया ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड के एक सेवानिवृत्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर बेनामी जमीनों की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। विधायक का दावा है कि पहले गगरेट विधानसभा क्षेत्र और अब गगल एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में सुनियोजित तरीके से बेनामी जमीनें खरीदी जा रही हैं, जो राज्य के हितों के खिलाफ है।
राकेश कालिया के आरोपों की गंभीरता यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने उक्त पूर्व अधिकारी पर राजनीतिक स्थिरता को भी चोट पहुँचाने का गंभीर आरोप लगाया। कालिया ने दावा किया कि इसी सेवानिवृत्त मुख्य सचिव ने हिमाचल प्रदेश की चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश में भी भूमिका निभाई थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हिमाचल जैसे शांत प्रदेश में ‘यूपी कल्चर’ (अपराध और माफिया तंत्र) लाने का प्रयास किया जा रहा है। विधायक ने गगरेट में दर्ज 8 लाख रुपये की धोखाधड़ी की एक विशेष एफआईआर का भी जिक्र किया और मांग की कि इस मामले के पीछे छिपे प्रभावशाली चेहरों को बेनकाब किया जाए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन आरोपों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सदन में ही एसआईटी जांच की घोषणा कर दी। उन्होंने विधायक राकेश कालिया को निर्देश दिए कि वे इन मामलों से जुड़े तमाम साक्ष्य और दस्तावेजों की प्रतियां स्वयं उन्हें और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सौंपें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी। सरकार के इस कड़े रुख से राज्य में जमीन के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की अपनी नीति को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की जमीन को माफियाओं के हाथ का खिलौना नहीं बनने दिया जाएगा।