मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मुंबई में हुई उच्चस्तरीय मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। एक साझा बयान के दौरान नरेंद्र मोदी ने भारत और फ्रांस के रिश्तों को अत्यंत विशिष्ट बताते हुए कहा कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में से एक रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर इस साझेदारी को न केवल अभूतपूर्व गहराई दी गई है, बल्कि इसे एक नई ऊर्जा के साथ ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के रूप में नई पहचान दी गई है।
इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी नतीजा विमानन क्षेत्र से सामने आया है। नरेंद्र मोदी ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत और फ्रांस मिलकर अब भारत की धरती पर उस विशेष हेलीकॉप्टर का निर्माण करेंगे, जो माउंट एवरेस्ट जैसी विशाल ऊंचाइयों तक उड़ान भरने की क्षमता रखता है। उल्लेखनीय है कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर होगा जो इतनी ऊंचाई तक उड़ सकेगा। इसे भारत में निर्मित करने के बाद यहीं से पूरी दुनिया को निर्यात (एक्सपोर्ट) किया जाएगा, जो रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को वैश्विक पटल पर प्रमाणित करेगा।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 को भारत और यूरोप के संबंधों के इतिहास में एक बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ करार दिया। उन्होंने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ संपन्न हुए भारत के अब तक के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और फ्रांस के आर्थिक व व्यापारिक संबंधों में भी एक नई और तीव्र गति का संचार करेगा। नरेंद्र मोदी के अनुसार, साझा विश्वास और भविष्य के प्रति एक समान विजन ही इस साझेदारी की असली शक्ति है।
भविष्य की तकनीक और कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया है। इनमें स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ’, ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर डिजिटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ और वैमानिकी क्षेत्र में कौशल विकास के लिए ‘नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग इन एयरोनॉटिक्स’ को लॉन्च किया जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि ये मात्र संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये आधुनिक विश्व के लिए ‘फ्यूचर बिल्डिंग प्लेटफॉर्म’ हैं।
अंत में, वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और ऐसे में भारत-फ्रांस की भागीदारी स्थिरता का एक मजबूत स्तंभ है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक संस्थानों में सुधार के जरिए ही आज की अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सार्थक समाधान निकाला जा सकता है। यह विशेष रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक शांति और विकास के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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