नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आज एक नए राजनैतिक भविष्य के लिए आम चुनाव हो रहे हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे से ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि 2024 के उस भीषण और हिंसक आंदोलन के 18 महीने बाद यह वोटिंग हो रही है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज रहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ने और देश से पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। इस बार के चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ पूरी तरह चुनावी मैदान से बाहर है।
बांग्लादेश की कुल 300 संसदीय सीटों के लिए करीब 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस बार मुख्य मुकाबला ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (बीएनपी) और ‘जमात-ए-इस्लामी’ के बीच देखा जा रहा है। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के असाधारण इंतजाम किए गए हैं, जिसमें लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और लोगों में अपने लोकतांत्रिक अधिकार के प्रति भारी उत्साह है।
हालांकि, मतदान के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा की खबरें भी सामने आई हैं। गोपालगंज के एक मतदान केंद्र पर देसी बम विस्फोट हुआ, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। इसके अलावा ढाका के मीरपुर इलाके में बीएनपी और जमात समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया है कि कई मतदान बूथों पर तोड़फोड़ की गई है और उनके पोलिंग एजेंटों को डराया-धमकाया जा रहा है। शेख हसीना के बेटे सजीब वाजिद ने भी बैलेट पेपर में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान शुरू होने से पहले ही कुछ उम्मीदवारों के पक्ष में मोहरें लगा दी गई थीं।
चुनाव के बीच प्रमुख नेताओं ने अपने वोट डाले हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने मतदान कर जनता से लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील की। बीएनपी के चेयरमैन तारिक रहमान ने भी ढाका के एक केंद्र पर वोट डाला और नागरिकों से बड़ी संख्या में घर से निकलने का आह्वान किया। जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार खालिदुज जमान ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कुछ जगहों पर पोलिंग एजेंटों की अनुपस्थिति में गुप्त कमरों में धांधली की जा रही है। इन तमाम आरोपों और छिटपुट हिंसा के बावजूद बांग्लादेश की जनता एक नई और स्थिर सरकार की उम्मीद में बढ़-चढ़कर वोटिंग कर रही है। मतदान के नतीजे आने वाले समय में बांग्लादेश की नई दिशा तय करेंगे।
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