Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी के सुशासन मॉडल से गांव-गांव पहुँची सरकार और लाखों लोगों को मिला सीधा लाभ – The Hill News

Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी के सुशासन मॉडल से गांव-गांव पहुँची सरकार और लाखों लोगों को मिला सीधा लाभ

देहरादून। उत्तराखंड में सुशासन और जनसेवा की दिशा में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम आज प्रदेश में गुड गवर्नेंस का एक सशक्त और भरोसेमंद मॉडल बनकर उभरा है। इस विशेष अभियान के जरिए सरकार केवल फाइलों या सचिवालय तक सीमित न रहकर स्वयं जनता के घर तक पहुँच रही है, जिससे उनकी समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने और उसे सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने का प्रभावी जरिया बन गई है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अभियान की सफलता साफ तौर पर दिखाई देती है। 3 फरवरी 2026 तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में इस कार्यक्रम के तहत कुल 555 जनसेवा शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इनमें से 548 कैंप पहले आयोजित किए गए थे, जबकि 7 नए कैंप हाल ही में लगाए गए। इन शिविरों के माध्यम से अब तक कुल 4,36,391 नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज की है। भागीदारी का यह बढ़ा हुआ आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि प्रदेश की जनता का सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर विश्वास बढ़ा है। अकेले हालिया सात कैंपों में ही 2,810 नए व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जो इस अभियान की निरंतरता और बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।

सुशासन की असली परीक्षा जनता की शिकायतों के निस्तारण में होती है, और इस मोर्चे पर पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इन जनसुनवाई शिविरों में अब तक कुल 43,032 शिकायतें और प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री की स्पष्ट नीति है कि केवल शिकायतें सुनना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध समाधान भी अनिवार्य है। इसी का परिणाम है कि इनमें से 29,042 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है। हाल ही के कैंपों में प्राप्त 428 शिकायतों में से 321 का मौके पर ही समाधान किया गया। यह प्रशासनिक तत्परता दर्शाती है कि राज्य सरकार जनहित के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीर है और समस्याओं को टालने के बजाय उन्हें हल करने में विश्वास रखती है।

केवल शिकायत निवारण ही नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं और प्रमाणपत्रों का वितरण भी इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। कैंपों के माध्यम से अब तक 61,460 से अधिक विभिन्न प्रमाणपत्र और सेवाएं नागरिकों को उनके गांव में ही उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कुल 2,39,766 नागरिकों को लाभान्वित किया गया है। यह सेवाएं उन लोगों के लिए विशेष रूप से वरदान साबित हो रही हैं, जिन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सरकार की इस ‘डोरस्टेप डिलीवरी’ व्यवस्था से लोगों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

पुष्कर सिंह धामी के इस गुड गवर्नेंस मॉडल का सबसे सकारात्मक प्रभाव उत्तराखंड की मातृशक्ति पर पड़ा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक की महिलाओं के लिए ये कैंप एक बड़ी सुविधा बनकर उभरे हैं। दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को अक्सर भौगोलिक विषमताओं के कारण प्रशासनिक केंद्रों तक पहुँचने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। अब उनके अपने गांव में ही पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। महिला लाभार्थियों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के भीतर प्रशासन के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई है।

इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन राज्य के सभी 13 जनपदों—अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में अत्यंत संतुलित तरीके से हुआ है। प्रत्येक जिले में वहां की स्थानीय भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासन सक्रिय रहा है। यह पुष्कर सिंह धामी की ‘समस्या-केंद्रित शासन प्रणाली’ को दर्शाता है, जहाँ शासन की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर उतरकर आम आदमी की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड में सरकार जवाबदेह है और प्रशासन मजबूती से जनता के साथ खड़ा है। यह अभियान लोकतांत्रिक सहभागिता और पारदर्शी शासन व्यवस्था का एक जीवंत उदाहरण पेश करता है। उत्तराखंड को राष्ट्रीय मानचित्र पर सुशासन के मामले में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह मुख्यमंत्री की एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है।

पुष्कर सिंह धामी ने इस सफलता पर अपना संकल्प दोहराते हुए कहा है कि उनकी सरकार का लक्ष्य सचिवालय की दीवारों से बाहर निकलकर अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँचना है। वे चाहते हैं कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक सरकारी सेवाओं का लाभ सरलता से प्राप्त कर सके। सुशासन, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस त्रिकोण पर टिकी उनकी सरकार आने वाले समय में उत्तराखंड को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि जब नेतृत्व में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासन को जनता के द्वार तक लाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना संभव है।

 

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