Karnatka: कर्नाटक सरकार ने ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम को तुरंत रद्द करने की मांग की, विधानसभा में लाया प्नस्ताव – The Hill News

Karnatka: कर्नाटक सरकार ने ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम को तुरंत रद्द करने की मांग की, विधानसभा में लाया प्नस्ताव

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में केंद्र सरकार के नए ग्रामीण रोजगार कानून को लेकर घमासान छिड़ गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें केंद्र से ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम को तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री सिद्दरमैया द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया गया है। राज्य सरकार की मांग है कि केंद्र सरकार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसकी पुरानी और मूल स्थिति में बहाल करे। इस प्रस्ताव के पेश होते ही सदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने प्रस्ताव पढ़ते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम को केंद्र ने बिना राज्यों की सहमति के ‘एकतरफा’ तरीके से लागू किया है। उनके अनुसार, यह नया कानून न केवल देश के संघीय सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के आजीविका के अधिकार के लिए भी अत्यंत हानिकारक साबित होगा। प्रस्ताव में यह भी तर्क दिया गया कि नया अधिनियम राज्य के खजाने पर अनावश्यक और बड़ा वित्तीय बोझ डाल रहा है, जो कर्नाटक जैसी राज्य सरकारों के लिए वहनीय नहीं है। इसके अलावा, कांग्रेस सरकार का आरोप है कि यह कानून विकेंद्रीकरण के सिद्धांत की धज्जियां उड़ाता है और ग्राम पंचायतों के अधिकारों व शक्तियों को छीनकर उन्हें कमजोर करता है।

प्रस्ताव में मनरेगा की सराहना करते हुए कहा गया कि पुरानी व्यवस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति निर्माण और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया था। जैसे ही मुख्यमंत्री ने यह प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा, भाजपा के नेता आर. अशोक के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को ‘सदन का विरोध’ न कहा जाए, बल्कि इसे केवल ‘कांग्रेस सरकार का विरोध’ माना जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा इस प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बनेगी। भाजपा सदस्यों की लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण मुख्यमंत्री सिद्दरमैया काफी असहज और गुस्से में नजर आए। उन्होंने सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से भी विपक्ष को जवाब देने के लिए कहा, जिससे सदन के भीतर शोर-शराबा और बढ़ गया। स्थिति को अनियंत्रित देख विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने कार्यवाही को दोपहर के भोजन तक के लिए स्थगित कर दिया।

इस पूरे विवाद में ‘नाम’ को लेकर भी एक नया राजनीतिक मोर्चा खुल गया है। प्रस्ताव में नए अधिनियम का संक्षिप्त नाम ‘वीबी-ग्राम-जी’ लिखा गया है, जबकि अधिनियम का वास्तविक नाम ‘वीबी जी राम जी’ है। भाजपा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को ‘राम’ नाम से इतनी ‘एलर्जी’ है कि उन्होंने प्रस्ताव में भी नाम बदल दिया। भाजपा नेताओं ने याद दिलाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पूर्व में इस अधिनियम का उच्चारण गलत तरीके से ‘वीबी-ग्राम-जी’ के रूप में ही किया था। भाजपा ने इसे भगवान राम के नाम के प्रति कांग्रेस की मानसिकता से जोड़कर देखा और सदन में इस पर काफी देर तक बहस हुई।

सदन में केवल रोजगार कानून ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को लेकर भी माहौल गर्म रहा। कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस एमएलसी नजीर अहमद द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा सदस्य सोमवार से ही नजीर अहमद से बिना शर्त माफी की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को भी भाजपा सदस्यों ने सदन के भीतर अहमद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे विधायी कार्यों में बाधा आई। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे गरिमामय पद के प्रति इस तरह की भाषा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

इधर, एक अन्य घटनाक्रम में कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वरा ने कांफिडेंट ग्रुप के संस्थापक सीजे राय की संदिग्ध मौत के मामले में बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआइटी) अब सीजे राय के परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। गौरतलब है कि सीजे राय 30 जनवरी को आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान अपने कार्यालय में गोली लगने से मृत पाए गए थे। गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि एसआइटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में रोजगार गारंटी कानून से लेकर अपमानजनक टिप्पणियों और हाई-प्रोफाइल जांचों तक कई मोर्चों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने की संभावना है।

 

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