देहरादून।
उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने जन सेवा और सुशासन की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार” अभियान के तहत आयोजित किए जा रहे विशेष शिविर प्रदेश के आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज सरकारी सेवाएं और योजनाएं फाइलों से निकलकर सीधे जनता की चौखट तक पहुंच रही हैं। इस अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक चार लाख से अधिक लोग इन शिविरों के माध्यम से लाभान्वित हो चुके हैं।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आज कुल 21 जन कल्याणकारी शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में जनता का भारी उत्साह देखने को मिला और एक ही दिन में 12,822 नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इन केंद्रों पर न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, बल्कि मौके पर ही आवेदनों का निस्तारण कर लोगों को विभिन्न सेवाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष रूप से मददगार साबित हो रही है, जिन्हें पहले छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों या सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे।
इस महत्वाकांक्षी अभियान के अब तक के सफर पर गौर करें तो राज्य भर में कुल 525 शिविरों का सफल आयोजन पूरा किया जा चुका है। इन सभी कार्यक्रमों में अब तक कुल 4,21,363 नागरिकों ने हिस्सा लिया है। लाभार्थियों की यह विशाल संख्या पुष्कर सिंह धामी सरकार की जनहितैषी नीतियों और प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता पर जनता के अटूट विश्वास को प्रकट करती है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुशासन का अर्थ केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है।
अभियान की मुख्य विशेषता इसकी कार्यकुशलता और पारदर्शिता है। एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य, राजस्व, शिक्षा, समाज कल्याण और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। इससे ग्रामीणों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों बच रहा है। पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि ‘सरकार आपके द्वार’ की यह अवधारणा तभी सफल हो सकती है जब प्रशासन स्वयं चलकर जनता के पास जाए। इन शिविरों के माध्यम से त्वरित सेवा वितरण सुनिश्चित कर सरकार ने सुशासन की एक नई परिभाषा लिखी है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इन शिविरों को लेकर काफी गंभीरता बरती जा रही है। जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ लेने में कठिनाई न हो। मुख्यमंत्री ने बार-बार दोहराया है कि उनकी सरकार जन सरोकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इन शिविरों की पहुंच और अधिक व्यापक बनाने की योजना है ताकि उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों का प्रत्येक नागरिक मुख्यधारा के विकास से जुड़ सके। इस पहल ने न केवल सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया है, बल्कि आम आदमी और शासन के बीच की दूरी को भी काफी कम कर दिया है।
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