लखनऊ।
अयोध्या में तैनात राज्य कर विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह के अचानक इस्तीफा देने के मामले ने अब प्रशासनिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल ने इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अयोध्या में तैनात अपर आयुक्त संतोष कुमार को इस जांच की जिम्मेदारी सौंपी है और निर्देश दिया है कि पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब दो दिन पहले प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा सीधे राज्यपाल को भेज दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्रशांत कुमार सिंह ने उन पर समाज को बांटने का आरोप मढ़ा और साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना खुला समर्थन व्यक्त किया। एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह का सार्वजनिक राजनीतिक और धार्मिक स्टैंड लेना सेवा नियमावली के विरुद्ध माना जा रहा है, जिसके कारण शासन स्तर पर हलचल मच गई।
इस्तीफे की खबर और उसमें दी गई दलीलों को संज्ञान में लेते हुए राज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव कामिनी चौहान रतन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आयुक्त नितिन बंसल को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने और शासन को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव के आदेश के बाद विभाग हरकत में आया और आयुक्त ने स्थानीय स्तर पर जांच अधिकारी नियुक्त कर रिपोर्ट की मांग की है। नितिन बंसल ने स्पष्ट किया है कि जांच की रिपोर्ट प्राप्त होते ही इसे शासन के समक्ष विचारार्थ भेज दिया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा आधिकारिक तौर पर शासन को प्राप्त हो गया है। हालांकि, यह मामला केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है। चर्चा है कि विभाग अब प्रशांत कुमार सिंह की नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों की भी नए सिरे से जांच कर रहा है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि उन्होंने गलत प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की थी। इस नए पहलू के सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। यदि प्रमाण पत्रों में हेराफेरी की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य कर विभाग के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर काफी चर्चा है। एक वरिष्ठ पद पर तैनात अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना और उसके बाद उनके करियर से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठना विभाग की छवि के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। फिलहाल, अपर आयुक्त संतोष कुमार इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या प्रशांत कुमार सिंह का आचरण सरकारी सेवा शर्तों का उल्लंघन है और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे की असल मंशा क्या थी। साथ ही, उनके शैक्षणिक और अन्य प्रमाण पत्रों की वैधता की पुष्टि के लिए भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। शासन को अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही इस प्रकरण में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।