वाराणसी।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की टीम ने पुलिस विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोली हैं। टीम ने सिगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली काशी विद्यापीठ चौकी के प्रभारी शिवाकर मिश्रा और उनके साथ तैनात सिपाही गौरव द्विवेदी को बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इन दोनों पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने एक आपराधिक मामले को रफा-दफा करने के बदले में पीड़ित पक्ष से मोटी रकम की मांग की थी।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो यह मामला पारिवारिक विवाद और महिला उत्पीड़न से जुड़ा है। छित्तूपुर क्षेत्र की निवासी ममता गुप्ता ने पिछले साल अगस्त में अपने पति प्रह्लाद गुप्ता और ससुराल पक्ष के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मुकदमे की विवेचना काशी विद्यापीठ चौकी के प्रभारी शिवाकर मिश्रा कर रहे थे। प्रह्लाद गुप्ता ने आरोप लगाया कि दारोगा शिवाकर मिश्रा ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने और केस को खत्म करने के लिए उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए दारोगा ने शुरुआत में पचास हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन काफी मिन्नतें करने के बाद यह सौदा बीस हजार रुपये में तय हुआ। दारोगा ने धमकी भी दी थी कि यदि समय पर पैसे नहीं मिले तो वह मुकदमे में संगीन धाराएं बढ़ाकर प्रह्लाद और उनके परिवार को जेल भेज देंगे।
रिश्वत की इस मांग से परेशान प्रह्लाद गुप्ता ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन की शरण ली और पूरे मामले की लिखित शिकायत की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद एंटी करप्शन की टीम ने एक गुप्त योजना तैयार की और आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। बुधवार शाम को जब प्रह्लाद गुप्ता तय योजना के अनुसार बीस हजार रुपये लेकर काशी विद्यापीठ चौकी पहुंचे, तो वहां का नजारा पुलिसिया भ्रष्टाचार को बयां कर रहा था। प्रह्लाद ने जैसे ही दारोगा को पैसे देने चाहे, उन्होंने खुद हाथ न लगाते हुए अपने पास मौजूद सिपाही गौरव द्विवेदी की ओर इशारा किया। जैसे ही गौरव द्विवेदी ने रिश्वत की रकम लेकर अपनी जेब में रखी, पहले से घेराबंदी किए खड़ी एंटी करप्शन की टीम ने दोनों को दबोच लिया।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को लालपुर पांडेयपुर थाने ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस उपायुक्त गौरव बंसवाल ने इस घटना को विभाग की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए त्वरित कार्रवाई की और आरोपित चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा एवं सिपाही गौरव द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जांच में सामने आया कि शिवाकर मिश्रा 2019 बैच के उपनिरीक्षक हैं और बस्ती जिले के मूल निवासी हैं, जबकि सिपाही गौरव द्विवेदी गोरखपुर के रहने वाले हैं और 2020 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे।
हालांकि, इस गिरफ्तारी के बाद मामले में एक नया मोड़ भी सामने आया है। पकड़े गए दारोगा शिवाकर मिश्रा की पत्नी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने एंटी करप्शन की टीम पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि एंटी करप्शन के किसी व्यक्ति ने उनके पति पर कोई गलत काम करने का दबाव बनाया था और बात न मानने पर उन्हें फंसाने की धमकी दी थी। उन्होंने दावा किया है कि शिवाकर मिश्रा को जबरन इस मामले में घसीटा गया है। इस वायरल वीडियो ने मामले में एक नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, पुलिस विभाग और भ्रष्टाचार निवारण संगठन अपनी जांच को आगे बढ़ा रहे हैं ताकि इस भ्रष्टाचार की गहराई तक पहुंचा जा सके। वाराणसी में हुई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और यह संदेश देने की कोशिश की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी।
Pls read:Uttarpradesh: उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने दी शिक्षकों को बड़ी राहत अब मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ