देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुक्रवार को उनके सरकारी आवास पर भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने शिष्टाचार भेंट की। जल शक्ति मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे राज भूषण चौधरी और मुख्यमंत्री के बीच हुई यह मुलाकात राज्य की जल सुरक्षा और भविष्य की सिंचाई परियोजनाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इस दौरान केंद्र और राज्य के बीच जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल योजनाओं की प्रगति, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण रणनीतियों पर विस्तार से सार्थक चर्चा की गई।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की जटिल पर्वतीय भौगोलिक संरचना और यहाँ के जल स्रोतों की संवेदनशीलता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड न केवल अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह देश की कई प्रमुख और जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल भी है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘जल जीवन मिशन’ को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक घर, चाहे वह कितनी ही ऊंचाई पर स्थित क्यों न हो, वहां तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
पुष्कर सिंह धामी ने जल प्रबंधन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सूखते जा रहे जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक जल संरचनाओं, जैसे नौले और धारों का संरक्षण करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहे।
केंद्रीय राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने उत्तराखंड में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, विशेषकर ‘नमामि गंगे’ और ‘जल जीवन मिशन’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य की चुनौतियां अन्य राज्यों से भिन्न हैं, इसलिए केंद्र सरकार यहाँ की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्वच्छता और जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों को प्रेरणादायी बताया और भरोसा दिलाया कि केंद्र से मिलने वाली सहायता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भविष्य की संभावित जल परियोजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के उपायों पर भी गहन विमर्श किया। चर्चा का एक मुख्य बिंदु जल संसाधनों का सतत उपयोग रहा, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना विकास कार्यों को गति दी जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग से उत्तराखंड जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के भीतर एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल होगा। इस बैठक ने राज्य में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।