चंडीगढ़. पंजाब में अवैध खनन की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक सख्त और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब राज्य में रेत और बजरी ढोने वाले सभी वाहनों पर जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से ही इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि जीपीएस सिस्टम लग जाने से सरकार इन वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग कर सकेगी। इससे यह पता चल सकेगा कि कौन सा वाहन कहां से रेत उठा रहा है और कहां जा रहा है। अगर कोई वाहन अवैध माइनिंग में संलिप्त पाया जाता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
इस दौरान एक अहम सवाल यह भी उठा कि सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि हर वाहन पर जीपीएस लगा हो और जो टिप्पर अवैध रूप से बिना नंबर के चल रहे हैं, उन्हें कैसे पकड़ा जाएगा। इस पर एक सुझाव आया कि रेत-बजरी ढोने वाले वाहनों का एक विशिष्ट रंग (कलर कोड) तय कर दिया जाए। वित्त मंत्री ने इस सुझाव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सरकार वाहनों का रंग एक जैसा करने के विचार पर गंभीरता से गौर करेगी।
कैबिनेट ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़े फैसले लिए हैं। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने ‘ऑन कॉल’ व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकार अब प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले या अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को जरूरत पड़ने पर बुला सकेगी। सरकार ने ऐसे 300 डॉक्टरों को इंपैनल करने की मंजूरी दी है। इन डॉक्टरों को ओपीडी में मरीज देखने पर प्रति मरीज 100 रुपये और इनडोर (भर्ती) मरीजों को देखने पर भी 100 रुपये दिए जाएंगे। एक डॉक्टर एक दिन में ओपीडी में 50 से 150 मरीज और इनडोर में 2 से 20 मरीजों की जांच कर सकेगा। कैबिनेट ने मेडिसिन, सर्जरी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स और ऑर्थोपेडिक्स समेत 12 श्रेणियों में इन विशेषज्ञों को शामिल करने का फैसला किया है।
इसके अलावा, सीमावर्ती जिलों में सरकारी कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए भी एक नई पहल की गई है। अक्सर देखा गया है कि बॉर्डर इलाकों में तैनात डॉक्टर और शिक्षक सिफारिश लगवाकर अपना तबादला करवा लेते हैं, जिससे वहां के लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पातीं। तरनतारन उपचुनाव के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री से इस समस्या की शिकायत की थी। इसे देखते हुए कैबिनेट ने फैसला किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों और शिक्षकों को विशेष इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने अधिकारियों को इस संबंध में जल्द प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है।
सरकार ने सोसाइटियों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 में भी ऐतिहासिक संशोधन किया है। वित्त मंत्री ने बताया कि जब से यह एक्ट बना है, पहली बार इसमें संशोधन किया जा रहा है। अब लोगों को मेंबर बनाकर ठगने वाली सोसाइटियों का ऑडिट करवाना अनिवार्य होगा और रजिस्ट्रार को प्रबंधक नियुक्त करने का अधिकार भी दे दिया गया है। वहीं, माइनिंग विभाग में प्रशासनिक सुधार करते हुए अपीलेट अथॉरिटी का काम अब सुपरिटेंडेंट इंजीनियर को सौंप दिया गया है। पहले यह काम स्टेट जियोलॉजिस्ट के पास था, लेकिन विभाग के उद्योग मंत्रालय से सिंचाई विभाग में आने के बाद पद की समस्या हो रही थी, जिसे अब सुलझा लिया गया है।